दगाबाज अफसर पत्नी

सांध्यकालीन समय था वातावरण में हल्का हल्का अंधेरा छा रहा था पंछी टोलियां के साथ आपस में कोई गाना गा कर या फिर यूं कहें कि संगीत की कोई धुन अलाप कर पंखों को फेला कर अपने अपने घरों को लौट रहे थे उनका उड़ने का दृश्य बहुत ही मनमोहक लग रहा था ऐसे ही … Read more

शांती निकेतन मनमीत कविता

 मन उड़ उड़ वहां जाता पहुंच कर वहीं के गीत गाता सुबह शाम अंधेरे में उजले में,रात में अकेले में नहीं घबराता वहीं पहुंच जाता और ऊंचे ऊंचे पहुंच, गमलों में क्यारियों में खिलते फूलों के साथ घूमते भंवरों के साथ मस्त हों नाचने लगता गाने लगता तब इसी नाच गाने के बीच मन को … Read more

गीत गाता चल अकेला कविता

 लो मेरे मीत हो गया यह जहां तुम्हारा छोड़ा यह झौपड़ी तुम्हारा जो बना था बसेरा हमारा में न लोटू अब यहां बस दुआ देना ही फर्ज तुम्हारा सबकुछ लूट गया अब क्या हैं न्यारा न्यारा किसे दूं दोष यहां दोषी हैं मन हमारा मेरे जज़्बात मेरा प्यार मेरे हालात ने मारा हैं  यह हृदय … Read more

चांद और आकाश का प्यार

 सूने आकाश में जब चांद का आगमन होता तब आकाश सौभाग्य शाली हों उठता और गर्व के साथ सीना तान कर बड़ी विनम्रता से कहा करता हम फिर धन्य हो गये  हमारे धीरज ने हमारे विश्वास ने  हमारे आत्मिय प्रेम ने  चांद को मजबूर कर दिया मेरे जैसे काले से भूरे से नीले से  टूटे … Read more

चांद और आकाश कि लव स्टोरी

 सूने आकाश में जब चांद का आगमन होता तब आकाश सौभाग्य शाली हों उठता और गर्व के साथ सीना तान कर बड़ी विनम्रता से कहा करता हम फिर धन्य हो गये  हमारे धीरज ने हमारे विश्वास ने  हमारे आत्मिय प्रेम ने  चांद को मजबूर कर दिया मेरे जैसे काले से भूरे से नीले से  टूटे … Read more

मजबूर संध्या

 संध्या आ गई पर आज सुहागिन नहीं है आज उसके चेहरे पर मुस्कान भरी लालिमा नहीं है  आज तो इन अभिमानी बादलों ने  तूफान और मेघों को न्योता देकर बुला लिया  संध्या बेचारी को मेहमानों के स्वागत में लगा दिया  उसे आज श्रंगार नहीं करनें दिया  उसे अपने प्रीतम सूरज से नहीं मिलने दिया  पिया … Read more

मेरा गांव कविता

 मेरे गांव तुम जब आओगे तब वस गांव को देखते रह जाओगे फिर तुम्हें गांव से लगे पहाड़ पर लें चलुंगा वहां से दिखाई देंगे हरे भरे खेत सामने कल कल करती वहती नदी  दूसरी ओर भरा सरोवर  हमारे गांव के छोटे छोटे कच्चे पक्के घर  उनके आस पास घूमते फटे कपड़े में घूमते  मेहनत … Read more

तारों का उदय

 ऐक तरैया पापी देखें दो देखें चांडाल तीन तरैया राजा देखें  फिर देखें संसार सांझ के वक्त में रोज  ऐक तरैया देख  पापी बनने का सौभाग्य पल भर को सही कर पाता हूं । जल्दी ही नज़र घुमा कर  दूसरी तीसरी कि तलाश  शुरू कर देता हूं । मन चाहता है कि दो तारें  ऐक … Read more