हवा के साथ

 जब कभी हवा के साथ सरसराहट

के साथ मेरे बदन को दुलारती है

जाने ऐसा क्यों लगता यह तेरा सिर्फ

तेरा संदेश सुनाती है

तेरी सांसों कि खुशबू

हवा में आ आत्मा को नवगीत सुनाती है

मेरे मायूस चेहरे को

खुशी से भर

दूर कहीं दूर चली जाती है

शान्त सा एकान्त पा

हवा फिर गले लग जाती है

बालों में ख्यालों में उलझ उलझ

हमें सब समझातीं है

प्रीत का ऐ गीत ये हवा हमें 

गंवाती है

तेरे ख्यालों में मुझे देख

पेड़ो के साथ मचल मचल जाती है।

Advertisementsn
Share via
Copy link