बंद कमरे का पाप कहानी

11 / 100

अंजलि आईने के सामने खड़ी होकर अपने रूप यौवन को देखकर इतरा रही थी माथे पर आई लटों को कभी इधर करती कभी उधर कभी भोहो पर छोटे से ब्रश से कोई क़ीम लगाती तब कभी औठो पर बदल-बदल कर लिपस्टिक लगाती तब कभी अपने सीने को देखकर लजाती तब कभी अपनी कटील आंखों को देखकर इधर उधर घुमाती क्यों न हो वह किसी जलपरी जैसी ही तो थी पतली कमर सुराहीदार गर्दन गुलाबी-गुलाबी गुलाब कि पंखुड़ियों जैसे होंठ, सुतवा नाक चोड़ा माथा फिर गर्दन के नीचे कमर तक लटकते हुए नागिन जैसे बाल गोरी त्वचा लम्बी छरहरी देह जब वह घर से कालेज जाने को निकलती थी तब मुहल्ले के छिछोरे लड़के उसकि स्कूटी के पीछे मोटरसाइकिल दौड़ाते कोई उसे गुलाब का फूल देकर प्यार का इजहार करता तब कोई महंगा मोबाइल फोन दिलाने का कहता तब कोई शायरी गा कर उसे लुभाने का प्रयास करता किन्तु वह किसी को भी भाव नहीं देती थी कारण वह संस्कार वान लड़की थी लेकिन कुछ दिनों से वह  लम्बी महंगी कार पर सवार खुबसूरत नौजवान कि और  आकर्षक हों रही थी हालांकि वह उसे सही तरीके से जानती भी नहीं थी बस कभी-कभी कालेज के पास वाली कुल्हड़ वाली चाय कि दुकान पर उसे देखकर अनदेखा कर देती थी खैर वह श्रंगार करते हुए ख्यालों में खोई हुई थी तभी उसको माँ कि आवाज सुनाई दी थी अंजलि आज कालेज नहीं जाना क्या 

जी बस तैयार हो गई हूँ उसने माँ को जबाब दिया था 

कुछ देर बाद वह स्कूटी सरपट दौड़ा कर कालेज पहुँच गयी थी वापसी में न चाहते हुए वह उसी कुल्हड़ वाली चाय कि कैंटिन में रुक गई थी।

भैया ऐक कप कुल्हड़ वाली चाय उसने कहा था 

कैंटीन कालेज के लड़के लड़कियों से भरी हुई थी उसे दूर कोने में ऐक खाली कुर्सी नजर आई थीं लम्बे-लम्बे डग भरते हुए 

हलों क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ शालीनता से पूछा था 

जी जी बैठिएगा दूसरी और से कहा गया था

अंजली उस नौजवान युवक को देखकर चौंक उठी थी अरे यह तो वही लड़का है जिस कि तरफ वह आकर्षित हो रही थी तभी वेटर कुल्हड़ वाली चाय ले आया था कुल्हड़ में से मिट्टी कि सोंधी-सोंधी महक आ रही थी झट से उसने पहला घूंट हलक में उतार लिया था सामने वाले नौजवान ने कहा था कि लगता है कि आप को कुल्हड़ कि चाय पसंद है।

जी जी दोनों में बातचीत होने लगी थी बातों-बातों में आप का नाम 

जी अभय डिसूजा 

और आपका 

अंजली सचदेवा 

दोनों ने एक  दूसरे के मोबाइल नम्बर ले लिए थे।

अंजली का आज मन पड़ने में नहीं लग रहा था वह बी काम पहले साल में थी कुछ देर मोबाइल पर वेब सीरीज देखती रही फिर उसने वाट्स एप से अभय को मैसेज भेजा

हलो हाय कैसे हैं आप 

जी अच्छा अभय ने जबाव में टाइप किया था 

आप क्या करते हैं 

जी मेरी नोएडा में कंपनी हैं 

अच्छा अच्छा आप कि तो शादी हो गई होंगी या फिर किसी के साथ रिलेशनशिप में होंगे 

हा तीसरी गर्लफ्रेंड के साथ था लेकिन कुछ कारणों से हमने ब्रेकअप ले लिया ऐसे ही चैटिंग अनेक दिन चलती रही थी फिर एक दिन अंजलि ने उसकी चोथी गर्लफ्रेंड बनने का प्रस्ताव स्वीकार कर अगले  दिन मिलने का वादा किया गया था।

दिल्ली में सर्दी चर्म पर थी साथ ही ठंडी हवाएँ चल रही थी वातावरण में कोहरा छाया हुआ था ऐसे मौसम में अंजली कनाट पेलेश से औरंगजेब रोड पर जाकर सौपिग माल के सामने स्कूटी पार्क कर वाट्स एप पर करंट लोकेशन शेयर कि थी थोड़ी देर बाद अभय लम्बी महंगी कार से आ गया था अंजलि कार में सवार हो गई थी कार सड़क पर सरपट भाग रही थी अंजलि ने पूछा था कि हम कहाँ जा रहे हैं 

तब अभय ने कहा फार्म हाउस बस कुछ ही किलोमीटर दूर है

कोहरे को चीरती हुई कार सड़क पर सरपट दौड़ रही थी अंजलि के मस्तिष्क में नाना प्रकार के ख्याल आ रहें थें अंदर बैठा अवचेतन मन उसे समझाने का प्रयास कर रहा था मच जा अंजलि देख पहले ही वह तेरी जैसी दो लड़कियाँ को छोड़ चुका है फिर दूसरे ही पल ख्याल आते-जाते नहीं-नहीं वह मेरे साथ धोखा नहीं करेगा और हाँ में तो सिर्फ उसके साथ घूमने जा रही हूँ मैं तो पास ही नहीं आने दूंगी फिर उसे वेब सीरीज के कुछ दृश्य देते कैसे ऐक दूसरे को चूमते हुए … आगे के दृश्य को याद करते हुए वह रोमांच से भर जाती फिर अगले ही पल माता पिता का ख्याल आता अगर कभी कोई उच नीच हों गई तब उनकी कितनी जग हंसाई होंगी कहीं मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहेंगे फिर कभी मन ही मन में भला उन्हें कैसे बंद कमरे का गुनाह मालूम पड़ेगा कहते हैं कि इंसान का अंतर्मन कोई भी बुरा काम करने से पहले उसे सचेत करता है लेकिन अंदर बैठा सैतान मन को दूसरी दिशा में ले जाकर पतन कि और धकेल देता है।

कार जैसे ही आलीशान फार्म हाउस के गेट पर पहुँची दरवान ने भारी भरकम गेट खोल कर सैल्यूट ठोंका था अभय ने गाड़ी से उतर कर खुद आगे का गेट खोल कर बाहर आने का इसारा किया था शायद पहले ही फार्म हाउस के अंदर के सभी नोकर नौकरानी को पहले से ही सूचना पहुँच गई थी इसलिए तो सभी इतंजार कर रहे होंगे अभय ने दरवान से काका यह मेरी मित्र मिस अंजलि  अभय के परिचय देते ही सभी नौकरों ने नमस्कार किया था फिर फार्म हाउस के बगीचे छोटा-सा नहाने वाला तालाब  और छोटा-सा खूबसूरत बंगला सब कुछ दिखाया था बंगले के अंदर का डैकोरेशन सजावट देख कर अंजलि चकित रह गयी थी और बैडरूम का नजारा अद्भुत था नक्काशी दार सीसम कि लकड़ी से बना पलंग उस पर मोटे-मोटे विदेशी गद्दे साफ स्वच्छ चादर तकिया कुशिंग और उससे सटा हुआ टायलेट जो कि इटालियन टायल्स संगमरमर से तैयार किया गया था।

अंजली ने कहा था यह सब आप का है 

जी ऐसे अनेक फार्म हाउस हैं दरअसल मेरे पापा का विजनेश ही फार्म हाउस खरीदना व फिर बेचने का हैं बातों-बातों में ही अभय ने उसे आगोश में लेकर किस करना, चालू कर दिया था थोड़ी प़तिरोध के बाद अंजलि सहयोग करने लगी थी कुछ छड़ बाद उसके मुंह से दर्द भरी चींखें निकल रही थी तभी अभय ने फुसफुसाते हुए कहा था कि मुझे नहीं मालूम कि तुम वर्जिन हों मुझे वर्जन लड़की बहुत पसंद हैं और हाँ मेरी पिछली तीनो गर्लफ्रेंड भी तो वर्जन ही थी बस मेरी जान कुछ देर और देखना कितना मज़ा आता है अंजलि आज पहली बार विना शादी के किसी पुरुष के आगोश में समा कर उसका पूर्ण रूप से सहयोग कर रही थी  अंजलि अब लड़की से औरत बन गई थी। कुछ महीने बाद अंजलि अभय हमें शादी कर लेना चाहिए 

उसके ऐसा वोलते हुए अभय ने कहा था इतनी जल्दी क्या मेरी जान अरे भाई हम लिव इन रिलेशन में रह रहे हैं यह शादी तो ही हैं।

नहीं मैं कानूनी सामाजिक रूप से तुम्हारी पत्नी बनना चाहती हूँ आपको शादी करनी ही होगी वह जिद पर अड़ी थी।

अभय ने कहा कि देखो मेरे पिताजी तुम्हारे साथ व्याह के लिए तैयार नहीं होंगे हम ऐसे ही रहेंगे मंजूर है तब ठीक वर्ना हमें अलग होना पड़ेगा।

उसके ऐसा कहते ही अंजलि के पैरों के नीचे से धरती खिसक गई थी आंखों से अश्रु निकलने लगें थें सिसकते हुए बोली अभय मैंने तुम्हें अपने तन और मन से स्वीकार किया जरा मेरे लिए भी सोचों में तुम्हारे बिना नहीं रह सकती फिर फूट फूटकर रोने लगी थी।

तुम्हारी जैसी लड़कियाँ कि यहीं परेशानी हैं तुमने भी तो मजे लिए और में जबरदस्ती तुम्हें तो नहीं लाया लगता है कि गले कि हड्डी बन रही हों दोनों के बीच जबरजस्त झगड़ा हुआ था ऐसे ही लड़ते झगड़ते हुए अपने-अपने घर आ गए थे।

अभय ने उसका मोबाइल नंबर वलैक लिस्ट में डाल दिया था अंजलि मन से और तन से दोनों और से दुखी थी कारण उसका पेट फूल रहा था ऐक दिन उसकि मम्मी का ध्यान उभरे हुए पेट पर गया था उसने पिता को बताया था भाइयों को मालूम पड़ गया था सांत्वना समझाने के बजाए उसे सभी ने डांट डपट दिया था यहाँ तक कि उसे घर से बाहर निकाल दिया था।

कुछ महीनों बाद मैली हो चुकी अंजलि सड़कों पर पागल हो कर भटक रहीं हैं सुनते हैं कि उस पगली ने वेटी को जन्म दिया था जिसे पुलिस कानूनन किसी संतान हीन दंपति ने गोद ले लिया बंद कमरे के पाप ने हमेशा-हमेशा के लिए… पागल बना दिया॥

Advertisementsn
Share via
Copy link