मानव इतिहास का अद्भुत मुकदमा

आज अदालत खचाखच भरी हुई थी कारण मानव समाज के इतिहास का अद्भुत मुकदमा का फैसला जो आने वाला था जज साहब चेंबर से आकर न्याय कि कुर्सी पर बैठ गये थे पेश कार ने श्री चुननी लाल पिता श्री राम लाल हाजिर हो फिर श्री मुन्नी लाल पिता श्री राम लाल हाजिर हो पेश कार कि पुकार पर दोनों मुलजिम अदालत में हाजिर हो गये थे साथ में दोनों का परिवार भी था जैसे की बेटे बहू नाती नातिन व कुछ रिशतेदार पड़ोसी उन सब के आने से अदालत का कछ खचाखच भर गया था पांव रखने कि भी जगह नही थी कारण यह था की मुलजिम दोनो भाई थे जिनकी उम्र सत्तर वर्ष से भी अधिक थी कमर हलकी हलकी झुकने लगी थी चेहरे पर बुढापे कि निशानी दिखाई दे रही थी उनके गाल अदंर टूटे हुए दातो के पास पहुंच गये थे दाढी मूछे सिर के बाल सफेद हो गये थे अब आप सभी के मन मे ख्याल आया होगा जरूर यह संपत्ति का मुकदमा होगा इन दोनो के बेटे बहुऐ नाती नातिन इन है परेशान करती होगी तब हम आप गलत है जरा कहानी में रहस्य रहने दिजिए तभी तो मजा है तभी तो लेखक का लिखने का उदेस्य सफल होगा ।

पेश कार के पुकार लगाते ही दोनों भाई जज साहब के सन मुख खड़े हो गए थे दोनों पछो कै बकील लम्बी लम्बी दलीलें दै रहे थे उनकी दलीलें सुनकर सभी कि आंखों में आंसू थै कारण यह मुकदमा ही अलग था आधुनिक समय में बूढे मां बाप को बोझ समझ कर उन्हें घर सै वाहर निकाल दैतै हैं या फिर किसी आश्रम में भेजकर अपने करतब यो सै निजात पा लैतै हैं परन्तु यह मुकदमा ऐसा नहीं था यहां तो दोनों भाई माता पिता को अपने साथ रखने कि लड़ाई लड रहै थै चूंकि माता पिता छोटै भाई कै पास रह रहे थे बढै भाई साहब को उनकी सैवा करने का सोभाग्य नही मिल रहा था इसलिए उसने मुकदमा दर्ज करवाया था उसकि दलील थी कि मुझे भी जन्मदाता कि सेवा करने का मौका दिया जाए मै उनकी सैवा करूंगा तभी तो भगवान हमारे ऊपर खुश होगै और में भगवान् कै सामने शिर ऊंचा कर खड़ा हो पाउगा वह फूटफूट कर रोने लगा था उधर छोटा भाई भी रोते हुए कह रहा था की मैं मन वचन कर्म वाणी सै माता पिता की सेवा करता हूं मेरी पत्नी बच्चे भी सहयोग करते हैं यह सच है कि माता पिता कि उम्र 115 साल से ज्यादा हैं उनका शरीर शिथिल हो गया है कभी कभी तो वै बिस्तर में ही पाखाना कर दैतै हैं जिसकि बदबू सारे घर में फैल जाती है।

उस बदबू से हमे पता चल जाता हैं कि उन्होने टटटी पेशाब कर दी है उनका विस्तर गीला हो गया तब में या मेरी पत्नी या फिर बैटा बहू जिनकि नाक में जल्दी बदबू समा जाती हैं वही जाकर साफ सफाई कर देता है यकिन मानिए हमे हमारे माता पिता प़ाण से भी प्यारे हैं और हा मैंने जब जन्म लिया था व शैशव अवस्था में था तब माता पिता की गोद में टटटी पेशाब कर देता था उन्हें मेरी टटटी पेशाब साफ करने में कोई घिन नही आती थी आज वह भी जीवन के अंतिम पडाव पर हैं मेरे खयाल से वह भी शैशव अवस्था में पहुंच गये है फिर से वह सिसक सिसक सिसक कर रोने लगे थे थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा की भैया मुझसे बड़े हैं में मन से आत्मा से उन्हें चाहता हूँ सम्मान देता हूं जब हमारा संपत्ति का बटवारा हुआ था तब भैया ने मुझे दो बीघा जमीन जयादा ही दी थी उस समय भी भैया माता पिता को अपने साथ रखना चाहते थे परन्तु मुझे छोटा जानकर मेरी जिद्द पर वह मान गये थे हालाकि बड़ा भाई पिता के समान होता हैं उनका आदेश सर्वोपरि है किन्तु माफ किजिये में माता पिता उन्हें नही दे सकता ।

दोनों भाई अपनी अपनी जिद्द पर अडे थे जज साहब के साथ दोनों पछ के वकील व अदालत के कछ मे खचाखच भरी जनता भी उनके माता पिता के प़ेम को देखकर नतमस्तक हो रही थी कुछ तो कह रहे थे की धन्य है वह माता पिता जिन्होने इन है जन्म दिया धन्य है यह दोनो भाई व इनका परिवार आखिर जज साहब को फैसला लिखना पड़ा था जो इस प़कार था यह अदालत आप दोनो भाई को आदेश देती है कि जब तक आप के माता पिता जिंदगी जी रहे हैं आप सभी परिवार सहित फिर से सामिल होकर मिल जुल कर साथ रहे व मिलजुलकर ही माता पिता की सेवा कर अपने करतब यो का निर्वाह करे आप दोनों से हम सभी को प़ेरणा लेनी चाहिए और खासकर नयी पीढ़ी को जिनहे माता पिता बोझ लगने लगते हैं इनसे सीखना चाहिए अदालत का फैसला आते ही दोनों भाई गले लग गये थे उनकी आंखों में खुशी के आंसू थै सारा परिवार खुशी था कारण एक वार फिर उन्हें ऐक छत के नीचे मिलजुलकर रहने का सोभाग्य मिल गया था।

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