प्यारा गली का कुत्ता

कहते है इंसान का सबसे करीबी दोस्त कुत्ता है हालांकि वह जानवर हैं उसका छोटा सा दिमाग है फिर भी वह सही समय पर अपने पालनहार के लिए इस्तेमाल करता है चलिए अब आपको ऐसे ही कुत्ता के बारे में जानकारी देता हूं ।

में जिस गली में रहता हूं उस गली में जायदा घर नहीं है तीस चालीस परिवार मिल जुल कर रहते है सभी ऐक दूसरे के सुख दुःख में शामिल होकर दुख व सुख भी बांटते है यू तो बढ़ते शहरीकरण में लोग ऐक दूसरे से मतलब ही नही रखना चाहते उसका कारण यह हैं कि इंसान के पास समय का अभाव है दूसरा वह मतलबी हो गया है ‌

अब आता हूं प्यारे डांगी पर वह एक अनाथ बच्चा था शायद वह मां से बिछुण गया था या फिर मां लापरवाह थी ठीक से कह नही सकता किन्तु वह छोटा सा था बच्चो के साथ खेलता बढो के आगे कू कू कर के पूछ हिलाकर दोस्त बनाने कि कोशिश करता उसने अपने सोमय व्यौहार से सभी का मन जीत लिया था अब पूरी गली के घर उसके अपने थे उसे सभी जगह भोजन मिलने लगा था देखते देखते वह बड़ा हो गया था उसकी दहाड़ भौंकने कि आवाज दूर दूर तक सुनाई दे रही थी अनजान आदमी गली में झांक भी नहीं पाता था गली के सभी परिवार ने उसका नाम वनी रख दिया था दूसरे शब्दो में वन के जीव ।

वह गली के ऐक ऐक आदमी कि मोटरसाइकिल, स्कूटी, कार के साउंड को सुनते ही खुश होकर मुस्कुराते हुए स्वागत करता था लेकिन गली में कोई किसी मेहमान का आना होता था तब वह भोकता हुआ गुस्सा जाहिर करता था फिर उससे यह कहा जाता था वने यह तो अपने मेहमान हैं क्या तुम इन्हे अपने व्योहार से नाराज करोगे क्या तुम्हे पता है की वह जब वापस अपने घर जाएगे तब तुमहारे स्वभाव को लोगों के बीच बताएंगे तब तुम्हारी कितनी बदनामी होगी ऐसा कहते ही वह मूक जानवर सब कुछ समझ कर मेहमान को सूघते हुए पूछ हिलाकर स्वागत करने लगता था उसके स्वभाव में अभूतपूर्व परिवर्तन हो जाता था मेहमान भी खुशी से उसके सिर को खुजलाकर उसके मधुर व्योहार कि तारीफ करते थे ।

वह ऐक बरसात कि रात थी मेघ गरजते हुऐ आसमान में ठंडी व गर्म वायु से युद्ध कर रहे थे दोनों ही सेनाऐ आमने सामने होकर अपने अषत्र शषत्र का प़योग कर रहे थे उस प़योग से आपसी घरषरण से बिजली चमक रही थी कुछ ही पलो मे बिजली किसी पेड पर या फिर किसी देवालयों पर गिरकर इंसान को नुकसान नही पहुंचा रही थी ऐसे मौसम में धरती के अंदर रहने वाले जीव जंतु वाहर आ गये थे जैसे कि फुफकार ते हउ नाग मेरे पड़ोस के घर मे ऐसा ही नाग आ गया था सारी गली के लोगों को पता ही नही था क्यो कि सभी नींद के आगोश में समाए हुए थे परन्तु हमारे गली का लाडले वनी पहरे पर थे नाग और उनके बीच आपसी संघर्ष चला था शायद दोनो ही हार मानने वाले नहीं थे जहां नाग उस परिवार के किसी सदस्य को डसने के लिये आया था वही गली का प्यारा वनी अपनी रोटी खिलाने वाले का कर्ज चुकाने वाला था दोनों ही अपना अपना काम कर रहे थे ।

जब सुबह पड़ोसी परिवार जाग कर वाहर निकला था पोर्च मे नाग भी मृत था व वने भी अंतिम समय मे था कुछ ही देर में सारी गली के लोग इकट्ठा होकर को डाक्टर के पास ले जाना चाहते थे पर अफसोस वह तो इंसान को छोड़कर इश्वर के पास पहुंच गया था गया था ऐक अनजान यात्रा कि और उसकी आत्मा जा रही थी जो शायद भगवान् का घर होगा ……?

Advertisementsn
Share via
Copy link