डर से भरी जिंदगी लेख

भाई साहब यह जमाना स्पेशलिस्टो का हैं समाज में बाजार में कोर्ट कचहरी, चिकित्सा खेती किसानी,जल वायु, शिक्षा, साहित्य, कविता, कहानी,लेख, चिंतन, दर्शन,पर सभी के पास, डिग्री हैं हो सकता है कि कुछ छेत्र या फिर में सुनील कुमार को अन्य विषय पर जानकारी न हो परन्तु मेरे डाक्टर ने बहुत सारी बीमारी बताई थी कारण यह था कि मेरी उम्र यो साठ साल से ऊपर हो गई थी भाई साहब आप लोगों को तो पता ही है कि यह उम्र अपने साथ बहुत सारी बिमारी लेकर आती है जैसे कि शुगर, ब्लेड प्रेशर कब्ज बात पित्त आदि मेरा परिवार का डाक्टर भी मनुष्य शरीर का स्पेशल स्पेशलिस्ट हैं जिसने मुझे बहुत सारी बीमारी बताई थी व उसका उपचार, खाना पीना समझाया था ।

ठीक है बीमारी का आना जाना जैसे सुवह सूर्य उदय होता है तब आंखों में उदय होते रंग मेरे शरीर में उर्जा उमंग भर देते हैं में अपने आप को तरोताजा समझने लगता हूं फिर उस समय के बाद मेरी धर्मपत्नी नाश्ता में आपको यह लेना है आपको यह नहीं लेना चाहिए आप को पता नहीं है कि अभी आपकी पिछले हफ्ते जो रिपोर्ट आई थी उसमें आप कि दिल कि धड़कन कम थी साथ ही शुगर का लेवल भी ज्यादा था डाक्टर ने आपको क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए कब खाना चाहिए सारा चार्ट बनाकर दिया था परन्तु आप समझते ही नहीं ।
में आफिस समय से जल्दी ही चला गया था मेरी कार को देखते ही कारखाने का दरबान चोक उठा था गेट खोलने से पहले उसने मोबाइल फोन पर जनरल मैनेजर को ख़बर कर दी थी बाद में गेट खोला था मैंने जैसे ही कार अन्दर प्रवेश कि थीं देखा जी ऐम के साथ बहुत सारे कर्मचारी स्वागत के लिऐ खड़े थे या फिर सावधान हो गये थें कहना मुश्किल है खैर मैं सभी कर्मचारियों के अभिवादन का जवाब देते हुए अपने आफिस में जाकर चेयर पर बैठ गया था प्यून मटके का पानी गिलाश में लें आया था जिसे में एक ही झटके में गट गट कर के पी गया था चुकी गर्मी का मौसम था मैंने प्यून से ऐ सी चालू करने का कहा था कुछ देर आंखें बंद कर चेयर पर ही आराम कर रहा था तभी बिना समय लिऐ मेरे कछ में किसी ने प्रवेश किया था आंख खोल कर देखा था तब सामने बढ़ा बेटा खड़ा था जिसके चेहरे के भाव बदले हुए थें माथे पर सिलवट थी आंखों से अंगारे निकल रहें थें आप को कार ड्राइव करके नहीं आना चाहिए ड्राइवर को किस बात कि तनख्वाह दे रहे हैं में उसकी खवर लेता हूं फिर कुछ छड़ों बाद बाबू जी आप को तो मालुम ही है कि कोरोनावायरस ने सारे संसार में कितना नुक्सान किया था मेरा मतलब लाखों जन हानी हुई थी उसका कार्य आपको शायद नहीं पता यह ऐ सी फ्रिज की ठंडी बोतले आईसक्रीम थें आप आंकड़े गूगल पर सर्च कर देख लिजिए भला कोरोनावायरस के समय कोई भी गरीब , मजदूर, किसान,या फिर पागल,या फिर,भीख मांगने वालों को सस्ती शराब पीने वाले पियक्कड़ों को उसने अपनी चपटे में लिया था शायद बहुत ही कम या न के बराबर पर हमारे जैसे अमीर लोगों का ज्यादा नुक्सान किया इसमें कोरोनावायरस कि गलती नहीं गलती हमारी हैं कारण हम मिटटी के मटके का पानी पीना भुल गए हैं गर्मी में बांस से बनी हुई पंखी को भूल गए हैं वारिस कै समय हम कंडे का धुआं जिससे मच्छर दूर भागते हैं वह भुल गए हैं आदि हमें वापस प़कृति के सानिध्य में जाना पड़ेगा तभी हमारा भला होगा इसलिए मैंने एक सी कि हवा बर्फ के पानी से हमेशा हमेशा के लिऐ परहेज कर लिया है और आप ने फिर से ऐ सी चालू कर दिया … आप घर जाएं हां मेरा ड्राइवर आपको मेरी कार से घर पहुंचा देगा वापस में आपका ड्राइवर आपकी कार ले ले जाएगा बेटे ने मेरी सेहत को ध्यान में रखते हुए बहुत सारा ज्ञान दिया था खैर मैं झक मारकर वापस कोठी पर आ गया था हाल में जाकर सोफे पर बैठ गया था शरीर में कुछ कमजोरियां महसूस हो रही थी शायद थकावट थी साथ ही चाय कि तलब भी हों रही थी तभी तो मैंने नौकरानी जिसका नाम कमला था आवाज दे कर कमला जरा सी मीठी चाय बना देना जल्दी मेरे मुंह से आवाज निकली ही थी तभी दोनों बहुएं पैर पटकते हुए हाल में आ गई थी खबरदार कमला जो बाबू जी को चाय दी हा डाक्टर ने उन्हें हरे पत्तों कि शक्कर दूध के बिना चाय का चार्ट बनाकर दिया हमें हर हाल में उसे ही फालो करना है समझी मज़े कि बात यह थी कि मेरी श्रीमती जी पूजा कर रही थी उनके मुंह से ईश्वर कि आराधना के लिऐ प्रार्थना के शब्द सुनाई दे रहे थे शायद चाय कि आवाज उनके कानों में प्रवेश कर गयी थी तभी तो वह भी पूजा अर्चना छोड़ कर समर में कूद पड़ी थी उन्होंने फटकारते हुए कहा था बुड्ढा को स्वाद चाहिए जीभ पर लगाम नहीं लगता है कि मति भ्रम हो गया है या फिर सठिया गया है कमली चाय मत देना ।
मेरी सेहत के प्रति अर्धांगिनी के अलावा बड़ा बेटा दोनों बहुएं बहुत ही सावधान थी मैं भी मन ही मन बहुत खुश हों रहा था व भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि हे परमेश्वर मुझे हर जन्म में ऐसी ही औलाद देना ऐसे ही बहूएं देना हे प्रभु आप का लाख लाख धन्यवाद धन्यवाद परन्तु कुछ महीनों से छोटा बेटा मेरी सेहत पर ध्यान नहीं दे रहा था सोचा कि लम्बा काम काज हैं बहुत सारे कारखाने हैं हजारों कर्मचारी हैं सभी को सम्हालने व्यस्त रहता होगा व फिर सरकार ने बहुत सारे कारोबार पर टैक्स लगा दिए हैं चूंकि सफल व्यापारी वहीं है जो कि अच्छे सी ए से काले धन को सफेद करा लें शायद उसी में उलझा हुआ होगा परन्तु वह बढ़े बेटे के साथ काले कपड़े पहनने वाले व्यक्ति को ले कर आ गया था आंतें ही बाबू जी आप को कितना समझाया पर आप मानते ही नहीं आपको पता है कि आप के शरीर में कितनी बीमारी हैं फैमिली डॉक्टर ने आप के लिऐ दैनिक गाइड लाइन जारी कि हैं किन्तु आप मानने वाले ही नहीं वह कुछ देर खामोश रह गया था फिर से कहा बाबूजी जैसा कि बढ़े भैया चाहते हैं कि आप के जीते जी संपत्तियों का बंटवारा हो जाना चाहिए डाक्टर के अनुसार आप को कभी भी अटैक या फिर लकवा आ सकता है इसलिए मम्मी जी के आदेश पर हम सभी ने वकील साहब के माध्यम से वसीयत तैयार कर ली है आप को यह साहब पड़कर सुना देंगे फिर आप से कागज़ पर जहां भी यह साहब कहें दस्खत कर दिजिएगा ?
कुछ देर तक में अपने परिवार के सभी सदस्यों के चेहरे को देखता रहा था बेटो को देखकर उनका बचपन याद आ गया था जैसे कि उनका शब्दों को समझने के लिऐ ओ ओ आ आ आदि बोलना फिर उंगलियों को पकड़ कर पैरों पर चलना मेरी पीठ पर बैठकर घोड़े हाथी उट कि सवारी करना उन्हें स्कूल भेजना आदि में हाल से उठकर स्टोर रूम में चला गया था अलमारी में से कुछ कागजात जो कि वसीयतनामा था जिसे पहले ही तैयार कर लिया था आकर बेटों के मुंह पर मार दिया था साथ ही तिरस्कार भरी दृष्टि से अर्द्धांगिनी को देखा था फिर कहा था तुम्हारे जैसे बेटे बहुएं लालची डाक्टर ही जीवन को भय ग़सत कर अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं में नै सभी के लिऐ समान संपत्तियों का बंटवारा कर दिया है साथ ही श्री मती को देखकर आपके साथ जीवन के चालीस साल व्यतीत किए थे फिर भी आप मुझे नहीं समझ पाई कोई बात नहीं मनुष्य के स्वभाव में भूल लालच हैं आज से में सभी रिश्ते नाते से अपने आप को मुक्त करता हूं और सभी बीमारी से ….
यकिन मानिए में परिवार के सभी सदस्यों को अपने आप सै दूर कर गया था परन्तु रहता सभी परिवार के सदस्यों के साथ था मुझे उसका यह लाभ हुआ कि मेरी सभी बीमारी गायब हो गई थी जैसे कि सुगर, अन्य …
कहानी का सार तृष्णा ही बीमारी को जन्म देती है ।
Advertisementsn
Share via
Copy link