तमाचा समाजिक लघुकथा

मिसेज शालीन मिस्टर अभिषेक के छोटे बेटे का व्याह हों गया था दंपति शहर के जाने माने पैसे वाले लोगों में गिने जाते थे अपने धन दौलत का दिखावा करने के लिए उन्होंने  तीन दिन बाद सामूहिक भोज का आयोजन रखा था इसके लिए  बढ़ा गार्डन किराए से लिया गया था गार्डन को भी दुल्हन जैसा सजाया गया था खूबसूरत रंगभरी लाइटें आसमान के तारों जैसी झिलमिला रही थी एक और विशाल स्टेज तैयार किया गया था सिंहासन पर दूल्हा दुल्हन बैठे हुए थे लोग रिश्तेदार आ आ कर आर्शीवाद गिफ्ट दें रहें सभी को कवरेज करने के लिए ड्रोन कैमरा हर एंगल से फोटो विडियो बना रहा था मेन गेट पर शहनाई वादन हो रहा था दूसरी ओर डीजे पर फिल्मी गाना लो में चली अपने देवर कि बरात लेकर में चलीं उस धुन पर बढ़ी बहू दुल्हे को स्टेज से नीचे लाकर डांस कर रही थी दर्शक मोबाइल फोन से विडीयो बना रहे हैं मेहमान तारीफों के पुल बांधे जा रहे थे बाहर सिक्योरिटी गार्ड बिसल बजाकर गाडियां पार्क करा रहे थें ।

चूंकि बफर सिस्टम चल रहा था मेहमान हाथ में कटोरी प्लेट लै लें कर मनपसंद पकवान परोश परोश कर खा रहे थे कुछ मिठाइयां कि तारीफ़ कर रहे थे तब वहीं कुछ लोग आलोचना कुछ लोग खामोशी से भोजन को चट कर रहे थे चटोरी महिलाएं पानी पुरी पाव भाजी चट कर खट्टी खट्टी डकारें लें रहीं थीं वहीं ढोल नगाड़ों पर अभी भी मेहमान थिरक रहे थे खुश हो कर कुछ लोग जेब से नोटों कि गड्डी निकाल कर न्योछावर कर रहे थे रात्रि के अंतिम पहर तक कार्यक्रम सम्पन्न हो गया था मिसेज शालीन पति के साथ टेबिल कुर्सी पर थाली रख रोटी का पहला निवाला मुंह में रख ही रहीं थीं तभी बड़े बेटे के तीन 
 साल के बेटे ने थाली खींच ली थी उसकि इस हरकत पर सारा परिवार आश्चर्य चकित रह गया था वह रो रो कर बूढ़ी दादी ,रोटी, तोतली भाषा में कह रहा था दरअसल उसके पापा कि दादी कि वयोवृद्ध थी बंगले में अकेले ही रह गई थी दरअसल खुशी के माहोल में परिवार के सभी सदस्य उन्हें भूल ही गए थे उनके खाना पीना का ध्यान ही नहीं था बच्चे कि इस हरकत पर सारा परिवार के सदस्यों को ऐसा लगा था कि मानों उसने अपने नन्हे हाथों से सभी के गाल पर तमाचा जड़ दिया था ।।
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