काल गर्ल वेब सीरीज भाग 1 व्यथा कथा

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 पिछले भाग से आगे….

भादों महीने में यूं तो घनघोर बारिश होना आम बात है परन्तु पिछले तीन दिनों से ज्यादा ही तेज़ गरज चमक से मेघ धरती पर मोटी मोटी बूंदें बिखेर रहे थे ऐसी घनघोर बारिश में मुम्बई का आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था नौकरी पेशा लोग दफ्तर आने जाने के लिए परेशानी का सामना कर रहे थे वहीं जिला प्रशासन ने स्कूल कालेज की छुट्टी कर दी थी कारण शहर कि अधिकांश सड़कें पर पानी लबालब भरी हुयी थी कुछ सड़कें पर पानी का बहाव बहुत ही तेज था मतलब उस बहाव में मोटरसाइकिल कारें भी वह गयी थी हालांकि नागरिकों के सहयोग से कोई जनहानि नहीं हुई थी खैर बरसात के मौसम में निचली बस्तियों में यह सब तों आम बात है ऐसे ही मौसम में हिचकोले खाती हुई पानी को चीरती हुई मर्सिडीज कार एक छोटे से खूबसूरत बंगला के पोर्च में खड़ी हो गई थी बंगला के आस पास पचास एकड़ खाली जमीन थी कुछ जगह रोड कंस्ट्रक्शन कम्पाउन्ड वाल  रो हाउस का काम चालू था कालोनी डबलप हों रहीं थीं कार के अंदर बैठे आंगतुक ने  झटके से कार का दरवाजा खोला था वाहर निकलने वाला शख्स लम्बा मजबूत देह का मालिक था साठ साल कि उम्र होने के बाद भी नवयुवक जैसा चुस्त दुरुस्त था उसके चेहरे पर चेचक के दाग़ थे  घनी दाढ़ी मूंछ थी हालांकि वह अधपकि थी जो उसके व्यक्तित्व को अलग ही दर्शाती थी  कमर में पिस्टल दबी हुई थी जो कि उसकी लाइसेंसी थी शख्स ने सिगरेट सुलगाई थी फिर लम्बा सा कश खींचा था नथुनों से बाहर निकल कर धुआं का गुब्बार वारिस कि मोटी मोटी बूंदें में एकाकार हो गया था थोड़ी देर बाद कालोनी का चौकीदार जो कि बूढ़ा आदमी था जिसके हाथ में टार्च थी देह पर रेनकोट था मुंह में सीटी थी मालिक को देखकर लम्बी लम्बी डग भरता हुआ आ गया था उसने सलाम ठोका था फिर उस बंगले के मुख्य गेट को चाबी से खोल दिया था व अन्दर जा कर सारे बल्ब चालू कर दिए थे आंगतुक जो कि कालोनाइजर था अन्दर प्रवेश कर डाइंग रूम में सौंपे पर बैठ गया था उसने बूढ़े को आदेशित लहज़े से कहा करूणा से कहो कि मालिक आये है।

जी हजूर बूढ़ा आदमी कुछ क़दम आगे जाकर एक रो हाउस जो कि मोंडल हाऊस के लिए तैयार था जिसके अंदर सर्व सुख सुविधाएं उपलब्ध थी उस का लोहे का गेट खोलकर मुख्य द्वार के पास बोरवेल के स्विच पर उंगली रख कर उसे आन कर दिया था कुछ छड़ों बाद कौन है लड़की कि आवाज सुनाई दी थी ।
बिटिया में धनीराम चोकीदार मालिक आए हैं आप को याद कर रहे हैं कुछ देर बाद बीस इक्कीस साल कि युवती अलसाई हुई सी बड़बड़ाते हुए छाता लेकर निकलीं थी यह मालिक भी अगर आना ही था तब पहले फोन पर कहां होता भला यह भी कोई तरीका हैं सारे दिन मेहनत कर अभी अभी तों नींद आई थी और जगा दिया फिर मन ही मन कुछ सोचते हुए बंगला में दाखिल हो गई थी कालोनाइजर जिसका नाम मिस्टर राहुल नागपाल था उसे देखकर सोफे पर से उठकर बाज जैसे झपटे थें गोद में उठा कर अंदर बेडरूम में प्रवेश कर चूमने लगे थें कुछ ही छड़ों में देह के वस्त्र नीचे फर्श पर पड़े ़़हुए थे शिकारी वाज के चुंगल में चिड़िया फड़फड़ा रहीं थीं करूणा वैसे ही फड़फड़ा रहीं थीं परन्तु दयाहीन बाज को तो अपनी देह कि भुख मिटाने से मतलब था लगभग आधा घंटे बाद वह लम्बी लम्बी सांसें भरता हुआ एक और लुढ़क गया था कुछ देर बाद तूने तों  मस्त कर दिया कसम से क्या जवानी है कितनी सुन्दर है तूं तो आग हैं आग करूणा तेरे लिए पांच बैडरूम किचन हाल सर्वेंट क्वार्टर सहित सर्व सुविधायुक्त फ्लेट लें लिया है ऐसे ही खुश रखेंगी तब फ्लेट तेरे नाम कर दूंगा और हां तेरे लिए कार भी खरीद दी हैं भाई शहर के जाने माने बिल्डर कि रखैल कि अलग आन बान शान रहेगी कल ड्राईवर को भेजूंगा उसके साथ आ जाना और हां साथ ही महंगे परिधान आइफोन वगेरह भाई अभिजात्य वर्ग कि सोसायटी है सोसायटी में इज्जत तो क़ायम रखना होंगी इसलिए अच्छे कपड़े चाल ढाल अच्छी होनी चाहिए समझी कुछ समझाइश देकर वापस चला गया था ।
करूणा फूल जैसी मसली हुई विस्तर पर निढाल पड़ी हुई सिसक उठी थी आंखों से अश्रु धारा वह निकलीं थी देह दर्द से भरी हुई थी रोती हुई अपने भाग्य को कोस रही थी सहसा वह अतीत में खो गई थी कितना अच्छा उसका परिवार था अच्छे माता पिता दो छोटे भाई बहिन सारे दिन दीदी दीदी कहते हुए आगे पीछे घूमते रहते थे मां बाप कि तों वह परि थीं उसे प्राणो से ज्यादा चाहते थे उसका बचपन से ही अच्छे स्कूल में एडमिशन कराया था हर प्रकार कि सुख सुविधा का ख्याल रखा था जैसे दसवीं कक्षा के बाद उसे स्कूटी दिला दी थी पर मोबाइल फोन नहीं दिला रहे थे उसके माता पिता का मानना था कि मोबाइल फोन से ही खासकर लड़कियां बिगड़ जाती है भोली भाली लड़कियां को चालाक लम्पटता से भरें हुए लड़के फोन नम्बर ले लेते हैं फिर शब्दों के माया जाल से उन्हें बहलाफुसला  कर उनकी अस्मिता से खिलवाड़ करने लगते हैं कुछ ऊच नीच होते ही लड़के अपना पल्ला झाड़ लेते हैं जो सही है आजकल ऐसे उदाहरण अधिकांश समाचारपत्र सोसल मीडिया में पढ़ने को देखने को मिलते हैं खैर वह मोबाइल फोन के लिए पापा से रूठ गई थी एक दिन तों खाना पीना भी नहीं खाया था तभी तो पापा उसके लिए टच स्क्रीन वाला स्मार्टफोन लाए थे हालांकि उसने पापा को बोर्ड एग्जाम में प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया था ऐसे ही वह बारहवीं कक्षा में पहुंच गयी थी अब वह बालिग हो गई थी मन में विपरीत लिंग के प्रति नाना प्रकार के ख्याल आ रहे थे वह साथ पड़ने वाले लड़को में अपना मनपसंद का राजकुमार खोजने लगीं थी हां उसका नाम भी तो राजकुमार सिंह था जो कि राजपूत था उसके चलने फिरने का बातचीत का अलग ही अंदाज था इशारें इशारे में कागज़ कि पर्ची पर एक दूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए थे फिर लम्बी लम्बी बातचीत वाट्स अप पर चेटिंग चलने लगी थी एक दोपहर को राजकुमार सिंह  दोस्त के फ्लैट पर लें गया था दोनों ही एक दूसरे से लिपट कर साथ जीना मरना कि कसम खानें लगें थें फिर दो वदन एक जान हो गये थें उसे अपने पूर्ण होने का पहली बार एहसास हुआ था उसे अभूतपूर्व आनंद मिला था कुछ पल के लिए वह सातवें आसमान कि सैर कर आई थी अब वह पूर्ण वयस्क औरत बन चुकी थी ऐसा अनेकों बार चोरी चोरी चलता रहा था कहते हैं कि इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते यह सब पिता को पता चल गया था उससे मोबाइल फोन छीन लिया था कुल मिलाकर उसके उपर बहुत सारी पाबंदी लगा दी थी स्कूल से नाम कटवाकर दूसरे शहर मोसी के पास पढ़ने भेज दिया गया था 
परन्तु वह राजकुमार को नहीं भूल पा रही थी सहेली से उसका हाल चाल पूछतीं रहतीं थीं कभी कभी सहेली के मोबाइल फोन से बात चीत होती रहती थी ऐसे ही एक दिन उसने अपना पता बता दिया था फिर अगले दिन ही राजकुमार उसे स्कूल के गेट पर खड़ा मिला था कापी किताब का झौला वहीं फेंक कर वह दोनों  मुम्बई भाग आए थे राजकुमार ने ठेकेदार के यहां पर सुपरवाइजर कि नौकरी ज्वाइन कर ली थी रहने के लिए कालोनी में ही उसे टीन सेड कि झोपड़ी मिल गई थी नया जीवन हालांकि परेशानी से भरा हुआ था परन्तु एक दूसरे को पाकर दोनों ही खुश थे परन्तु ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था एक दिन राजकुमार रोड ऐक्सिडेंट में चल बसा था उस दिन वह बिना व्याह कि विधुर महिला बन गई थी रो रो कर आंख सूज गई थी संसार में हर जगह अंथैरा दिखाई दे रहा था चूंकि हमेशा हमेशा के लिए घर के दरवाजे उसके लिए बंद हो गये थें उसे मालूम था कि वापस जाने पर उसे न ही मां बाप स्वीकार करेंगे न ही समाज !
आजीविका कि परेशानी थी जहां पर भी काम ढूंढने निकलती थी काम देने वाले उसके योवन को निहार कर मन ही मन रसपान करने लगते थे कहते हैं कि औरतों को इश्वर ने इंसान कि निगाहें पहचाने कि अद्भुत शक्ति दी है तभी तो वह उनकी नियति को पहचान कर वापस झुग्गी में आ जाती थी उसके बगल कि झुग्गी में मिस्टर नाग पाल का कालौनी का चौकीदार रहता था उसे शायद दया आ गई थी एक दिन उसने कहा बेटी मेरी नज़र में तेरे लिए काम हैं पैसा भी अच्छा मिलेगा रहने को भी मिल जाएगा अगर तूं हां कहें तब में बात करूं हां हां काका बात किजिए परन्तु बेटी बुरा तो नहीं मानोगी मालिक रंगीन मिजाज के व्यक्ति हैं तेरे जैसी खूबसूरत लड़कियां उनकी कमजोरी है जरा विचार कर मुझे बताना उसने ठंडे दिमाग से हर पहलू पर विचार किया था फिर काका को हां कह दी थी फिर उसे नागपाल के मार्केटिंग कंपनी के साईट आफिस में चाय पानी कि नौकरी मिल गई  थी नागपाल मुम्बई का जाना माना अय्याश पैसे वाला था हालांकि वह बात अलग थीं कि उसको भी भगवान ने तीन लड़कियां दी थी सभी करूणा से  बड़ी थी दो लड़कियां तों शादी शुदा थीं एक लड़की कुंवारी थी वह पिता के व्यापार को सम्हाली हुए थीं ।
पहलेवाला दिन अच्छा निकला था परन्तु स्याह रात होते ही नागपाल ने अपना असली रुप उजागर किया था सारी रात वह उसे नोचते रहा था उसके रूप यौवन कि तारीफ़ कर कुछ बादे कर नीम अंधेरे मे मर्सिडीज पर सवार होकर चला गया था 
करूणा हाईराइज विल्डिंग के टाप फ्लोर पर फ्लेट में रहने लगी थी बालकनी से उगते हुए सूर्य जो आधा समुद्र के अंदर दिखाई देता था आधा बाहर वह दृश्य देखकर वह निहाल हो जाती थी सुबह सुबह समुद्र के तट पर लड़के लड़की हाथ में हाथ डाल कर घूमते हुए दिखाई देते तब उसे राजकुमार कि याद आ जाती थी मन ही मन दुखी हो कर बड़े निष्ठुर निकलें आप मुझे मझधार में छोड़ कर खुद अनन्त यात्रा पर निकल पड़े यह तों आपने कोई न्याय नहीं किया मुझे यहां छोड़ दिया पता हैं आपको वह सेठ मेरे साथ विस्तर पर क्या सलूक करता है मेरी देह के साथ आत्मा भी तार तार हो कर छलनी हो जाती है सोचती हूं इसी बालकनी से कूद कर तुम्हारे पास आ जाऊं परन्तु यह निष्ठुर प्राण निकलेंगे यकिन नहीं  
लिखना जारी अगला भाग जल्दी ही 
 
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