“मंगल गृह”विता मानव समाज का नया बसेरा

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मार्स गृह या 

यो कहें लाल गृह 
तुम बहुत बहुत दूर थें 
असंख्य तारों गृह के 
बीचों-बीच रहस्यमय 
रूप से छिपें हुए थे ।
फिर भी हमनें तुम्हें खोज लिया 
आप कि 
सीमा को पार कर 
हम अपने यंत्रों, से 
तुम्हारे  पास पहुंच गए 
तुम्हारे सब रहस्य लोक का 
अध्यन किया ।
अब कहो तुम्हरा  घंमड 
कहां रहा 
कि हम छिपें हुए हैं 
मानव हमें नहीं 
ख़ोज सकता ।
अब कहो तुम्हरा
 घमंड कहां रहा ।
हमने तुम्हारे दिल पर 
अपने यंत्रों से 
छेद किए 
मिट्टी का परीक्षण किया 
फिर धातुओं को खोजा ।
गैस जैसे कि कार्वन आक्साइड 
या लीथीयम या फिर जिंदगियों जीने 
के लिए आक्सीजन !!
पता चला कि बादल भी हैं 
जहां पर वे अपने 
अनमोल कण  
बिखरते हैं । 
शायद किसी गैस या फिर केमिकल 
के हो सकतें हैं ।
ठीक है यह 
आपकी रचनाएं हैं 
पर तुमने जल को 
छुपा रखा था ।
वह भी कुछ मीटर अंदर 
हमने ढूंढ लिया 
अब कहो मंगल ग्रह 
तुम्हारे घमंड का क्या हुआ ??
हमारे यंत्रों ने तुम्हारे पहाड़ देखें 
चट्टानों का परीक्षण किया
तलहटी में जाकर हजारों
फिट नीचे जीवाष्म 
खोजें 
कभी तुम भी हरे भरे थे 
तुम्हारे पास भी कल कल करती 
नदियों का भंडार था 
जिनसे करोड़ों साल पहले 
पृथ्वी जैसे जीव जन्तु 
मीठे जल से अपना 
गला तर करते थे 
सुना है कि कभी तुम्हारे पास भी 
खेत खलिहान रहें होंगे 
जहां पर अन्न भंडार भरे पड़े होंगे
तुम्हारे पास भी कुएं तालाब 
रहें होंगे ।
पर सब कुछ नष्ट हो गया 
शायद तुम घमंडी थें 
या फिर तुम्हारे पास जो भी 
उस जमाने कि सभ्यता 
होंगी वह मानव को मानव 
नहीं समझती होगी 
शायद इंसान ने 
इंसान का शिकार 
करना शुरू कर दिया होगा 
शायद तुम्हारे पास टैक्नोलॉजी 
अधिक होंगी 
जिससे बनाई गये होंगे 
अनेकों रोबोट 
जिनके दिमाग में होंगे करोड़ों 
कमान 
जिन्होंने कर लिया होगा 
जल जंगल जमीन पहाड़ आकाश पाताल पर कब्जा 
उनके पास रहें होंगे आधुनिक 
हथियार ओर यंत्र
दागते होंगे करोड़ों मील दूर पर 
गोले 
करते होंगे मनमानी 
देते होंगे चुनौती 
करते होंगे निर्दोष 
प्राणी का संहार 
और अत्याचार 
तब  उनके क़िया कलापों 
से तुम्हारे ऊपर रहने वाले 
मानव खुश होते होंगे 
फिर भूल गए होंगे 
परमेश्वर को 
शायद उन्हें भी दें दी होंगी 
चुनौती 
उनके वनाए हुए नियम 
धर्म जल जंगल जमीन पहाड़ 
और प़कृति 
सबको तुच्छ समझते होंगे
फिर रोबोट और मानव समाज के
बीचों-बीच चलीं होंगी होड़ 
अपने आप को सिद्ध करने कि 
कौन बड़ा था कोन छोटा-सा 
किसके पास कितना बाहुबल है 
कितना ज्ञान विज्ञान अध्यात्म है
रोबोट का परम पिता परमेश्वर टैक्नोलॉजी होंगी!
और इंसान का परमेश्वर भगवान हों
जिनके पास जाकर किसी मंदिर मस्जिद या चर्च या होंगे कोई 
मठ जहां करते होंगे पेयर 
गलतियां भूल चूक करिएगा 
परमेश्वर माफ़ ।
क्यों कि हम तो हैं आप के 
अंश 
मंगल ग्रह यहां तक तो 
ठीक-ठाक हों सकता है 
पर तुम्हारी छाती पर 
होंगे सैकड़ों धर्म 
जिनके थें भगवान अलग-अलग 
जो भूल गए थे कि 
खून का रंग रूप गुण 
सब एक हैं 
सभी के परमेश्वर 
सभी धर्म ग्रंथों में 
मानव से मानव को 
मानवता के अर्थ बताएं 
गये हैं 
जैसे कि कभी भी किसी का 
बुरा नहीं करना 
रोगी व्यक्ति, बूढ़ा,
सभी कि सेबा करना 
फिर जल जंगल जमीन पहाड़ 
जंगली जानवरों, पेड़ पौधों 
सभी के समान व्यवहार करना 
पर मंगल ग्रह तुम घमंडी थें 
शायद तुम्हारे अंदर ही
कुछ कमी होगी ,
जो तुमने उन्हें कंट्रोल नहीं 
किया ।
उन्हें बेलगाम घोड़े जैसा 
दौड़ना दिया
इसलिए 
लिखना जारी है!!
  
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1 thought on ““मंगल गृह”विता मानव समाज का नया बसेरा”

  1. मंगल ग्रह पर इंसान बस्ती बसाकर रहना चाहता है पर वह बहुत ही रहस्यमय है आसानी से अपने राज इंसान को नहीं बताना चाहता है ।

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