” सौतेली मां ” नारी का त्याग समर्पण कि कहानी ।

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भादों मास कि अंधियारी रात्रि थी आकाश में मेघ नगाड़ा बजा कर धरती पर मोटी मोटी बूंदें बिखेर रहे थे वातावरण में मेंढक झींगुर कि मिलीं जुली आवाजे सुनाई दे रही थी ऐसा लगता था कि जैसे गिटार पर कोई धुन बजा रहे हों या फिर अपने राग से मेघ को धन्यवाद दे रहे हों पर इनके संगीत अलाप में गांव के कुत्ते बाधा उत्पन्न कर रहे थे ऐसे ही समय में रामू अपने एक साल के बेटे के पेट पर हींग का लेप लगा रहा था परन्तु फिर भी बालक रो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्यों रो रहा था कोन सा रोग बालक को परेशान कर रहा था पास में ही रामू कि मां बैंठी हूई थी उनसे बालक का रोना धोना सहन नहीं हो रहा था कमजोर आवाज में बड़बड़ाते हुए कहा था हैं हे भगवान् तूं तो दयालु है बालक पर दया कर फिर भगवान आपका ऐसा क्या बिगाड़ा था जो आपने मेरी बहू को जिसके दो फूल जैसे बच्चे थें उसे हमसे छीन कर अपने पास बुला लिया अब आप ही बताइए भगवान् इनका पालन पोषण कैसे होगा में तो सुखी हुई टहनी हूं पता नहीं कब टूट कर गिर जाऊं कब प्राण देह से निकल जाएं  कब….. हींग के लेप से बालक को आराम मिल गया था वह पिता कि गोद में ही सो गया था शायद उसके पेट में दर्द था रामू कि मां ने बालक को अपनी गोद में ले लिया था अब तूं सौ जा बेटा में इसे सम्हाल लूंगी मेरे ख्याल से थोड़ी देर बाद ही ब्रह्म मुहूर्त होने वाला होंगा फिर तुझे सुबह गाय भैंस को दुहना भी हैं और उनका गोबर समेटकर भूसा खली भी करना है फिर खेतों को भी देखना है मेरा मतलब कुछ खेतों मे जल भराव ज्यादा हों रहा है उन्हें कल नौकरों से जल बाहर निकलने के लिए नाली भी बनवा देना ताकि मूंग उड़द कि फ़सल सड़ कर खत्म न हों ….

रामू का सुख से भरा हुआ घर संसार था परिवार में बुजुर्ग माता जी ही थी पिता जी बहुत पहले ही स्वर्ग सिधार गए थे माता जी ने ही पिता जी के गुजर जाने पर घर कि बागडोर संभाली थी खेती बाड़ी पर ध्यान दिया था उसे पढ़ाया लिखाया था आलीशान मकान कार मोटरसाइकिल टैक्टर व अन्य खेती के औजार खरीद कर बिकास शील किसानों कि फेहरिस्त में शामिल कर लिया था यहीं कारण था कि उसके खेत बारह महीने लहलहाते हुए दिखाई देते थे माता जी खरीफ और रबी सीजन का बोनी के समय का खासा ध्यान रखतीं थीं वैसे भी खेती का मूल मंत्र है समय का प्रबंधन फिर कहावत भी है कि डाल का चूका हुआं बन्दर और अषाढ़ का चूका हुआं किसान कभी भी कहीं भी ठिकाने ंनहीं लगते  ?? कुछ खेतों में सब्जी हर प्रकार कि हर सीजन के हिसाब से लगाई जाती थी जिससे रोजाना हजारों रूपए कि आमदनी होती थी कुल मिलाकर किसान गरीबी में ही जन्म लेता है व गरीबी में ही मर जाता है दूसरे शब्दों में किसान कर्ज में ही जन्म लेता है व कर्ज में ही मर जाता है यह मिथक गलत साबित कर दिया था भाई कर्म ही पूजा है कर्म से ही धन दौलत मिलती है और कर्म के लिए पसीना बहाना पड़ता है यही कारण था कि रामू हर साल लाखों रूपए कि फसल का मुनाफा कमाता था ।
उसकि शादी बहुत ही खूबसूरत सुन्दर अप्सरा शुशील लड़की से हुई थी घर गृहस्थी चलाने में चतुर थी   एक एक पैसा दांत के नीचे रखने में निपुण थी पति और सास माता जी कि दुलारी थी शादी के पांच साल बाद उसे पहली संतान बेटी हुई थी व फिर दो साल बाद बेटा सब कुछ अच्छा चल रहा था परन्तु वह भी भादों कि रात्रि थी आकाश में बिजली चमकती थीं गांव कि लाइट यानी बिजली फाल्ट थी चारों ओर घुप अंधेरा था ऐसे ही अंधेरे में काला नाग जौ यमराज के रूप में आया था उसने डस लिया था गांव वालों ने झार फूंक करने वाले ओझा के पास जाने को कहा था उसने बहुत सारे मंत्र मान भानेज कि कसमें रखी थी परन्तु ज़हर बढ़ता ही गया था फिर अंत में अस्पताल डाक्टर को दिखाया था लेकिन पत्नी को नहीं बचाया जा सका था इक्कसवीं सदी चल रही है टेक्नोलॉजी का समय हैं मेडिकल साइंस ने भी बहुत ही तरक्की कि हैं परन्तु आज भी भारत के गांव के भोले भाले लोग सर्प दंश के उपचार हेतु ओझा का विश्वास करते हैं यही कारण है कि हर साल लाखों लोग अनायास ही काल के गाल में समां जातें हैं । 

रामू सुबह गाय भैंस कि सेबा कर फिर खेतों का मुआवना करके घर आ गया था अम्मा बच्चों को नहला धुला कर दूध पिला रही थी बड़ी बेटी तो आराम से दूध पी रहीं थीं परन्तु बेटा अभी भी रो रहा था अम्मा ने रामू को देखकर कहां था आ गया वेटा हाथ मुंह धोकर नाश्ता कर ले मैंने बनाकर रख दिया और चाय को गर्म कर लेना बेटा ऐसा लगता है कि मुन्ना का पेट फूल जाता है डाक्टर को दिखाना होगा ?
रामू आंगन में ही खाट पर अम्मा के बगल में बैठ गया था फिर उसने बेटे को गोद में उठा कर अरे अरे  लै लें क्या हुआ मेलें राजकुमार को पेट में दर्द हैं हो हो पापा तुझे डाक्टर के पास ले जाएगा मेरा बेटा अच्छा हो जाएगा बिटिया पास ही बैठी थी वह भी पीता कि गोद में बैठ गई थी अच्छा अच्छा दीदी भी चलेंगी हैं न पिता के वात्सल्य भाव से बेटे ने रोना धोना छोड़ कर पिता कि और टूकर टूकर देख रहा था साथ ही छोटे छोटे पतले गुलाबी होंठ से मुस्कुराते हुए शायद पिता के लाड़ प्यार देने के लिए धन्यवाद कह रहा था हे भगवान् हे परमेश्वर कभी भी किसी बच्चे कि मां को नहीं छीनना नहीं छीनना….

अम्मा ने बेटा एक बात कहूं आज सुबह ही तेरे व्याह के लिए जो तेरी मोसी हैं उनके दूर के रिश्तेदार का फोन आया था लड़की बारहवीं तक पड़ी लिखीं हैं तेरी मौसी कहती हैं बहुत ही सुन्दर खुबसूरत समझदार  घर चलाने वाली लड़की हैं  परिवार गरीब है खैर हमें उससे कुछ लेना देना नहीं अगर तूं हां कहें तब में आगे बातचीत बढ़ाने का सोचूं  नहीं नहीं अम्मा में इन फल जैसे बच्चों को सौतेली मां के भरोसे नहीं … नहीं अम्मा में तो इन्हें पाल पोस लूंगा फिर अभी तो आप भी हों मेरे ख्याल से आप दस पन्द्रह साल तो मेरा साथ दे ही दोगी आप कि छत्र छाया में यह बच्चे पल जाएंगे !
तब अम्मा ने कहा बेटा में मानती हूं कि सौतेली मां का नाम ही ख़राब है पर जरा सोच वह भी एक नारी होंगी उसके अंदर भी ममता होंगी स्वाभिमान होगा समर्पण का भाव होंगा बेटा कभी भी एक हाथ से ताली नहीं बजती है किसी कि कन्या जब दुल्हन बनकर दुसरे परिवार में पहुंचती है तब उसका सब कुछ एकाएक बदल जाता है उसके माता पिता भाई भाभी बहिन सखी सहेली सब कुछ छुट जाता है एसे में उसको प्यार सम्मान अपनापन देना चाहिए फिर देखना वह बहू सास ससुर को अपना मां बाप समझने लगेगी ननद देवरानी जेठानी को सखी सहेली सारा घर स्वर्ग से भी सुंदर लगेगा  फिर कुछ कड़क आवाज में अम्मा ने कहा कि मैंने रिश्ते के लिए हां कह दी है देव उठनी ग्यारस के बाद तेरी शादी होंगी समझा यह मेरा फेसला हैं रहीं बात इन बच्चों कि तब मैं इन्हें पाल पोस लूंगी जब तक यह बच्चे समझदार नहीं होंगे में मरने वालीं नहीं  ।
रामू का दूसरा विवाह हों गया था उसे फिर से शुशील सुडोल सुगठित, अप्सरा जैसी सुभद्रा नाम कि पत्नी मिली थी उसने आते ही घर सम्हाल लिया था सारे दिन अम्मा अम्मा के आगे पीछे घूमतीं रहतीं थीं अम्मा जो भी कहती वह आंख बंद करके वह सब मान लेती थी कोई भी शिकायत का मौका नहीं देती थी  सुबह जल्दी उठकर सारे घर कि साफ सफाई नहा धो कर सभी के लिए चाय नाश्ता तैयार करतीं थीं बच्चों को भी सम्हाल कर उन्हें नहलाने उनके कपड़े धोना उन्हें समय पर दूध खाना खिलाना और सुलाना आदि बच्चे अपनी नई मां के साथ जल्दी ही घुल मिल गए थे इतनी सेबा तपस्या समर्पण के बाद भी अम्मा उस पर बच्चों के प्रति अविश्वास रखतीं थीं शायद इसका कारण सौतेली मां शब्द ही था उधर रामू भी उसके देह भोगने से ही ज्यादा मतलब रख रहा था सुभद्रा उसके लिए बिस्तर पर उसकी दहकती काम वासना को शांत करने का साधन ही था बेचारी सब कुछ समझ रहीं थीं फिर भी अनजान बनकर निस्वार्थ भाव से सभी के प्रति अपने कर्तव्यों का इमानदारी से निर्वाह कर रहीं थीं ।
एक दिन मुन्ना को ज्वर हों गया था  साथ ही पेट फूल जाता था हींग का लेप लगाया गया था फिर भी आराम नहीं हों रहा था उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था  लगभग दस दिन रात सुभद्रा उसकी सेबा कर रहीं थीं उसके सिर पर ठंडे पानी कि पट्टी रखतीं हाथ सिरिंज लगी हुई थी हाथ पकड़ कर रखती कभी जरा सा भी रोता हुआ देखती तब भागकर नर्स को बुला लेती थी उसकि एसी सेबा से अम्मा के मस्तिष्क में जो जाले बुने हुए थे जो उन्होंने कुत्सित मानसिकता बना रखीं थीं काफी हद तक साफ हों गये थें वह निश्चिंत होकर गांव आ गई थी अब अस्पताल में पति पत्नी बच्चे ही थें अस्पताल में हम दो हमारे दो के पोस्टर दीवारों पर लिखे हुए थे उसने नर्स से पूछा था दीदी यहां आपरेशन कहां होता है व कब में अपना आपरेशन कराना चाहती हूं तब नर्स ने कहा जैसे कि तुम्हारी सास ने बताया था कि तुम इन बच्चों कि सौतेली मां हों क्या यह सही है ।
जी  शुभदा ने कहा 
तब बेटा तुम्हारा यह निर्णय तुम्हारे भविष्य के लिए अच्छा साबित होगा जैसे कि खुद कि कोख से पैदा बच्चा मां बाप का ज्यादा ख्याल रखते हैं तब सुभद्रा ने कहा देखिए आप को ज़माने का तजुर्बा ज्यादा हैं फिर आप मेरी मम्मी कि उम्र के बराबर है आप जो कह रहीं हैं हों सकता है सही भी हो परन्तु जैसा कि मैंने अपने जीवन में गांव में देखा था कि किसी किसी के चार चार लड़के बहुएं थी फिर भी बे लोग मेरा मतलब उनके माता पिता एक एक रोटी कपड़ा  के मोहताज थें वह बच्चे तों उनके अपनी कोख से पैदा किए गए थे फिर ऐसा माता पिता के प्रति व्यवहार ?? आप बता सकतीं हैं ।
नर्स उसके तर्क पर खामोश हो कर विचार मग्न थीं शायद उसके पास ज़बाब देने के लिए शब्द नहीं थें तभी तो तूं ही बता बेटी …
इसका पहला कारण यह है कि उन्होंने खुद ही अपने मां बाप कि सेवा नहीं कि होंगी मतलब सास ससुर आदि फिर प़कृति  का नियम है कि इंसान जैसा बोओ गा वैसा ही काटेगा मतलब हम जैसा भूतकाल में कर्म करेंगे व्यवहार करेंगे वह भविष्य में हमारे सामने आएगा दूसरा कारण संस्कार यह बच्चे अभी कोमल कपोल डाल हैं में इन्हें जैसे भी मोड़ना चाहूंगी यह मुड़ जाएंगे अच्छे संस्कार दूंगी अच्छे नागरिक बनगे परिवार के प्रति इमानदार रहेंगे फिर तीसरा कारण अधिक संतान जिन्हें सिर्फ संपत्ति , घर, जमीन जायदाद का बंटवारा से ही मतलब रहता है बे बुढ़े मां बाप को एक दूसरे पर ही थोपते रहते हैं अब आप ही बताइए क्या में सही बोल रहीं हूं ।
रामू भी पर्दे के उस पार नर्स और पत्नी कि सारी बातें सुन रहा था अब वह अपने आप को शर्मिन्दा महसूस कर रहा था जिस स्त्री को में केवल देह सुख का साधन समझता था उसका इतना विशाल हृदय बढ़ी सोच दूरदर्शी आंखें यह तो मेरे जीवन में  लछमी बन कर आ गई है सरस्वती जी इसकी जिव्हा पर बैठी हुई है यह तो देवी का अवतार है ।
बूढ़ी नर्स ने कहा था तूं सही बोल रहीं हैं बेटी 
तब फिर यह बच्चे मेरे हुए या नहीं फिर आप  लोगों का नारा दिया हुआ है कि हम दो हमारे दो हमारे दो रामू पर्दे से बाहर निकल कर  हंसते हुए बोला था   फिर गम्भीर स्वर में कहा सुभद्रा सच कहूं मेरे मन में सौतेली मां शब्द के प्रति ही बैर था इस शब्द से घृणा थी परन्तु आपने इस शब्द को ऊंचा उठा दिया आप जैसी पत्नी को पाकर मेरा जीवन सफल हो गया आप जैसी मां को पाकर मेरे बच्चों का जीवन भविष्य वर्तमान सब कुछ सुरक्षित , सम्हाल दिया आप धन्य है आप पूजा के लाएक हैं आप ….. एकाएक पति को सामने पाकर सुभद्रा लजा गई थी सिर पर पल्लू डाल कर पलंग पर से खड़ी हो गई थी तभी बूढ़ी नर्स ने कहा था कल सुबह तेरा आपरेशन करा देंगे इसलिए कि हम दो हमारे दो दोनों पति पत्नी ने संयुक्त रूप से कहां था ।
कुछ सालों बाद बेटी प्रोफेसर थी उसकि शादी हो गई थी उसके भी दो बच्चे थें मुन्ना कि डाक्टर था उसका भी व्याह हो गया उसने गांव में ही अस्पताल खोल लिया था अम्मा स्वर्ग सिधार गई थी सुभद्रा सारे घर कि मालकिन थी बेटा बहू सारे दिन मम्मी जी मम्मी जी कहते हुए उसकि ममतामई छांव में बैठकर आनंद लें रहें थें  रामू अभी भी खेती बाड़ी में व्यस्त रहते थे फुर्सत के समय में पत्नी बच्चों के हम उम्र साथियों के बीच तारीफें करते रहते थे भाई क्यों न ऐसा घर संसार किस्मत बालों को ही नसीब जो होता है ।
  यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी कमेंट कर बताइएगा आपका काका 
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1 thought on “” सौतेली मां ” नारी का त्याग समर्पण कि कहानी ।”

  1. सौतेली मां सारे संसार में इस शब्द को अच्छा नहीं समझा जाता यह शब्द सुनकर लोगों के मन के भाव बदल जाते हैं ।
    सुभद्रा ने अपने त्याग तपस्या से इस शब्द को ऊंचा उठा दिया प्रस्तुत है यह कहानी ।

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