” घर “कुशल गृहिणी जो कोरोनावायरस के कठिन समय में पति आर्थिक स्थिति से जूझ रहा था वाहर निकाल लाई

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रविवार कि सुबह  सूर्य उदय का समय था मिस्टर नरेश मजूमदार फ्लेट कि बालकनी से सूर्य उदय उदय कि अलौकिक आभा को देखकर रोमांचित हो रहें थें गोल गोल मटोल घेरे में विभिन्न रंग जैसे कि जीवन कि दशा दिशा का जीने का निर्देशन कर रहे थे वह भावों में खोए हुए थे कि तभी मिसेज मजूमदार एक चाय बिस्कुट अखबार लें आई थी बालकनी में दो कुर्सियां छोटी सी डाइंग टेबल थी दोनों ही बैठ कर चाय पीने लगे थे व अंग्रेजी भाषा के अखबर  का सम्पादकिय पेज मिस्टर मजूमदार ने  लिया था बाकि का अख़बार मिसेज मजूमदार   पन्ने पलटते हुए खास खास खबरें पड़ रही थी तभी उनकी नज़र विज्ञापन पर पड़ी थी विज्ञापन रो हाऊस बंगलों प्लाट का था जो कि वहुत ही लुभावना था जैसे कि शहर कि प्राइम लोकेशन पर ५२०० रूपए में बुक कराएं आज ही आए पहले आए पहले पाएं सभी बैंक से ऋण सुविधा उपलब्ध हैं आदि ।

मिसेज मजूमदार ने पति को विज्ञापन दिखाते हुए कहा कि कितनी सुन्दर जगह हैं चारों ओर पहाड़ जंगल तालाब प्रकृति के सानिध्य में सुनिए आज छुट्टी है हम अपना घर खोजने जाएंगे ।
मिस्टर मजूमदार लेख पढ़ रहे थे जो कि प़कृति से इंसान का छेड़छाड़ पर आधारित था लेख में भविष्य कि परेशानी का चित्रण किया गया था  जैसे कि जंगल कम होने से कम वर्षा होना ज्यादा गर्म वातावरण होना ओजोन परत में छेद होना इत्यादि  तभी तो एक बार में उन्होंने पत्नी कि बात अनसुनी कर दी थी पर जब पुनः पत्नी ने कहा तब उन्होंने कहा था सुरभी प्राइवेट जॉब है नौकरी कभी कभी छोड़नी पड़ती है कभी कंपनी खुद ही निकाल देती है बहुत ही दिमाग पर प्रेशर रहता है जरा सी लापरवाही कि कंपनी ने वाहर का द्वार दिखाया ऐसे में अपना घर खरीदने का मन से ख्याल निकाल दिजिए फिर अभी बच्चों कि फीसें जमा करना  पड़ती है बच्चों का भविष्य हमारे हाथ में है में रिस्क नहीं लेना चाहता किराया का फ्लेट हैं किराएदार बनकर ही रहो सख्त लहजे से जवाब दिया था पर जैसा ही सख्त लहजे से मिस्टर मजूमदार का था उससे भी ज्यादा कड़क आवाज मिसेज मजूमदार कि थी  ।
तब क्या सारा जीवन किराया के फ्लेट में ही व्यतीत करना पड़ेगी नहीं नहीं अब आपको ख़ुद का घर खरीदना पड़ेगा भले ही मेरे जेवर गिरवी रख दिजिए अपनी कार को बेचकर मोटरसाइकिल से आफिस जाइए ।
मिसेज मजूमदार हालांकि पड़ी लिखीं महिला थी पर घरेलू थी पहले बूढ़े सास ससुर कि सेवा बच्चे , ननद ,देवर जी कि पढ़ाई लिखाई उन पर नजर रखना फिर दोनों कि ही  शादी व्याह , उन्होंने  अपना धर्म कर्म समझ कर इमानदारी से निर्वाह किया था इन सब कर्तव्यों से निर्वाह करनें में जिंदगी के महत्वपूर्ण कुछ साल कब व्यतीत हो गये थें पता ही नहीं चला था चूंकि अब बच्चे भी कालेज में पढ़ रहे थे समझदार भी हों गये थें तब उन्होंने पति से कहा भी था क्यों न में भी किसी प्राइवेट स्कूल में टीचर कि नौकरी कर लूं पर मिस्टर मजूमदार ने यह कहकर में काम कर रहा हूं ना ,क्या कुछ कमी रह जाती है ।
खैर मिस्टर मजूमदार परिवार सहित अपना घर देखने को गये थें जेसे कि अखबार में प्रकाशित विज्ञापन में कालोनी कि जो भी विशेषताएं थीं सभी बराबर थी साइट पर मार्केटिंग कंपनी के कर्मचारी कस्टमर का हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए स्वागत कर रहे थे प्यून सभी को चाय काफी ठंडा पानी सर्व कर रहा था एक भीड़ कुछ युवा सेल्स गर्ल अपनी मनमोहक अदा से मुस्कुराते हुए साइट विजिट करा रही थी एक और विभिन्न बैंकों के एजेंट अपना अपना पांडाल सजाए हुए बैंक लोन का व्याज ओफर समझा रहे थे मिस्टर मजूमदार के दोनों ही बच्चे बालिग थें वह बड़े ही ध्यान से सब कुछ समझ रहें थें सारे परिवार ने गहन विचार मंथन कर के दो मंजिला रो हाऊस बुक कर लिया था पर मिस्टर मजूमदार को घर के खर्चे बच्चों कि फीसें व नये घर कि ई एम् आई कि देने कि चिंता सता रही थी यह सब उनकी लिमिटेड तनख्वाह से कैसे होगा ??
परिवार अपने घर में रहने आ गया था मिस्टर मजूमदार ने खुद के खर्च करने पर पाबंदी लगा दी थी कार कि जगह मोटरसाइकिल से साइट पर जाने लगें थें सब कुछ अच्छा चल रहा था परन्तु तभी कोरोनावायरस महामारी ने दवे पांव से सारे संसार में प्रवेश कर तहलका मचा दिया था सरकार ने सख्ती से सभी को घरों में कैद कर दिया था जो सही भी था बड़ी बड़ी मल्टी नैशनल कम्पनी आसमान से धरातल पर आ गई थी ऐसे में लाखों कर्मचारी को कम्पनी ने वाहर का रास्ता दिखा दिया था चूंकि मिस्टर मजूमदार भी कंट्रक्शन कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर थें उन्हें भी घर बैठना पड़ा था ऐसे में परिवार आर्थिक स्थिति से जूझ रहा था वह अंदर ही अंदर टूट कर बिखरने लगे थे अब उन्हें बैंक कि ई एम् आई जमा करने कि चिंता सता रही थी हालांकि सरकार ने कोरोनावायरस काल में बैंकों से राहत देने कि गुजारिश  कि थी जो बैंकों ने मान भी ली थी ।
एक सुबह मिस्टर मजूमदार चिंतित उदास बैठे हुए थे  उन्हें खुद पर ही गुस्सा आ रहा था कारण उन्होंने नौकरी में रहते हुए बचत नहीं कि थी अगर कि होती तब ऐसे कठिन समय में वह धन काम में आ जाता अब क्या होगा कैसे होगा बच्चों कि फीसें कैसे जमा करूंगा कार जेवर सब कुछ बेचना होंगा बुद्धी पर पत्थर फेंके गए थे जो उन्होंने कर्ज लेकर घर खरीदा ऐसा मन ही मन सोच रहें थें मिसेज मजूमदार पति कि चिता से दुखी तो थी पर उनके हाव भाव से चिंतित होना दिखाई नहीं देता था शायद बे फ़िक्र थी तभी तो उन्होंने पति को छेड़ दिया था ।
मिसेज मजूमदार :-  चाय के साथ गरमागरम मूंग के पकोड़े खाइए उन्होंने हंसकर कहा ।
मिस्टर मजूमदार  :- वाह वाह वाह क्या बात है में यहां चिंता में जिंदा लाश बनता जा रहा हूं और आप को हंसी ठिठोली सूझ रही है ।
मिसेज मजूमदार ;- बंटी बबली ( बच्चों का नाम) अरे भाई जल्दी से जल्दी आइए गरमागरम मूंग के पकोड़े इमली कि चटनी चाय इंतजार कर रही है ।
मिस्टर मजूमदार :- पत्नी कि हंसी ठिठोली ठहाके से और चिढ़ कर हां हां जल्दी से जल्दी आइए पापा कि नौकरी जाने कि खुशियां मनाइए आपकी मम्मी बहुत खुश हैं उन्हें जरा सी भी चिंता नहीं कि इस घर का कर्ज कैसे दिया जाएगा तुम्हारी पढ़ाई लिखाई कैसे होगी राशन पानी कहां से आएगा मेरे पास जो भी था तुम्हारी मम्मी ने डाउन पेमेंट में बैंक को दे दिया मैंने मना किया था अभी किराएदार बनकर ही रहो पर मेरी तो कोई बात सुनता ही नहीं ।
सारा परिवार गरमागरम मूंग दाल के पकोड़े खा रहा था बच्चे जबरदस्ती पापा को खिला रहें थें साथ ही चहक रहें थें टेलीविजन पर समाचार चैनल कोरोनावायरस के आंकड़े उसके विभिन्न गुणों को बता रहें थें कुल मिलाकर इंसान को भयभीत डराने का कार्य पूरी इमानदारी से निर्वाह कर रहे थे ।
बच्चों कि हंसी ठिठोली से मिस्टर मजूमदार चीख उठें थें उनकि आवाज डाइंग रूम से बाहर निकल रही थी शायद कुछ बड़बड़ाने लगें थें उनके एकाएक ऐसे व्यवहार से सभी खामोश हो गये थें अब टेलीविजन भी बन्द हो गया था शांती का वातावरण था तभी फिर से मिसेज मजूमदार ने हंसते हुए बेटी से कहां था बबली जरा अलमारी में से मिठाई का पेकट ले आना तेरे पापा को खिलाना है पैकेट आ गया था जब उसे खोला गया तो उसमें नोटों कि गड्डी थी कुछ पांच पांच सो कुछ सो दो सो रुपए कुल मिलाकर लाखों रूपए रहें होंगे यह सब कुछ देखकर मिस्टर मजूमदार चकित रह गए थे तभी मिसेज मजूमदार ने गम्भीर स्वर में कहा था आप मुझे क्या समझते थे में उन गृहिणी में से नहीं जो कि हर माह महंगी महंगी साड़ियां सौंदर्य सामाग्री ब्यूटी पार्लर पर हजारों रूपए पति कि गाड़ी कमाई का उड़ाती है जिन्हें घर का खाना अच्छा नहीं लगता हफ्ते में दो दिन बच्चों सहित होटलों में खाती है माना कि मैं पड़ी हूं आधुनिक समय कि नारी हूं संजना संवरना मेरा अधिकार था फिर मैंने इसी खर्च क लिए आपसे हर महीने हजारों रूपए लिए थे जिन्हें मैंने कभी कभी ही खर्च किए होंगे सब कुछ बचत कर के रखतीं गई थी इसी समय के लिए फिर मैंने आपको घर खरीदने का जोर दिया था जबकि मुझे मालूम था कि आप सरकारी अधिकारी नहीं है प्राइवेट नौकरी का कोई भरोसा नहीं ? 
आप को पता तों होगा मैंने बच्चों के लिए लैपटॉप और एक कम्प्यूटर खरीदा था तब में राज कि बात बताऊं में पार्ट टाइम ओन लाइन काम कर रही थी जिसमें मुझे अच्छी तनख्वाह मिलती है फिर मोबाइल फोन को खोलकर उसमें से बैंक का मैसेज पति को दिखाकर देखिए लाखों रूपए जमा हैं आप चिंता न करें नौकरी ही तों गई थी फिर मिल जाएंगी चलिए गरमागरम मूंग दाल के पकोड़े खाइए ।
मिस्टर मजूमदार के चेहरे पर रौनक लोट आई थी खुशी खुशी से उन्होंने कहा था आज में अपने आप को धन्य समझता हूं गर्व महसूस करता हूं जो मुझे आप पत्नी के रुप में जीवन सहचरी मिली उनकी आंखों से खुशी के अश्रु धारा वह निकलीं थी …
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1 thought on “” घर “कुशल गृहिणी जो कोरोनावायरस के कठिन समय में पति आर्थिक स्थिति से जूझ रहा था वाहर निकाल लाई”

  1. यह कहानी कुशल गृहिणी पर आधारित है जो कि पड़ी लिखीं आधुनिक समय कि महिला है पर दूरदर्शी सोच वालीं थी चूंकि कोरोनावायरस काल में पति कि नौकरी चली जाती है जहां पर परिवार पर आर्थिक स्थिति का बोझ बढ़ जाता है तभी वह अपनी सूझबूझ से परिवार को मुख्य धारा में ले आतीं हैं ।

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