“सात चुड़ैले” लोक कहानी

पुराने समय कि बात हैं एक गांव में बुद्ध प्रकाश नाम का व्यक्ति रहता था वह गरीब था परिवार में माता पिता एक बहन थी परिवार बहुत गरीब था परिवार को बेटी की शादी की बहुत चिंता हो रही थी कारण धन की कमी थी उनके पास खेती भी नहीं थी कुछ बकरियां से ही घर का खर्च व जीवन यापन कर रहे थे बुद्ध प्रकाश को बकरियों को चराने की जुममेदारी दी गई थी बाकी घर के सदस्य मजदूरी कर रहे थे हालांकि उसका नाम बुद्धिप्रकाश था पर वह दिमाग से कमजोर था जितना ही वह करता था जो उसे उसके माता-पिता बोलते थे एक दिन उसकी माता ने 7 रोटी पकाई थी जो कि सब्जी नहीं थी तब उसकी माता ने नमक चटनी बनाकर उसे कपड़े में लपेटकर बांधी थी फिर वह वकरीया चराने के लिए जंगल में पहुंच गया था उसे एक कुआं दिखाई दिया था जिसमें अंदर पानी पीने के लिए सीढ़ियां लगी हुई थी वह उसके अंदर गया था फिर रोटी निकाल कर कहने लगा था कि एक खाऊं दो खाऊं तीन खाऊं या फिर सारी ही खा जाऊं ।
उसके ऐसा कहते ही उसमें से एक चुड़ैल प्रकट हुई थी उसने कहा देखो हम सात बहिनें है यह हमारा धर है हम यहां पर बहुत समय से रहते हैं हम किसी को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाते फिर तुम हमें क्यों खाना चाहते हो ।
बुद्धि प्रकाश पहले तो डर गया था फिर उसने साहस कर के कहा था कि अगर मैं तुम्हें छोड़ दूंगा तब तुम बदलें में हमें क्या दोगे ।
तब उस चुड़ैल ने उसे कटोरा देने का कहां था जिसमें मुंह से कहने पर ही छप्पन भोग मतलब मनपसंद जो भी खाना खाने का था कटोरा भर जाता था बुद्ध प्रकाश ने खुशी-खुशी वह कटोरा ले लिया फिर जब भी उसे भूख लगती थी वह खाली मुंह से कहता और उसे मिल जाता था ।
एक बार फिर से वह सात रोटी ले कर कुआं के अंदर पहुंच गया था फिर से उसने कहा था कि एक खाऊं कि दो खाऊं कि सारी ही खा जाऊं उसके ऐसा कहने पर दूसरी चुड़ैल प़कृट हुई थी उसने कहा था हमें मत खाना देखो तुम्हें हम एक हजार सोना के सिक्के देते हैं तुम उन सिक्कों से अपनी बहिन कि शादी धूमधाम से कर सकते हों वह खुशी खुशी सिक्के घर ले आया था फिर उसने धूमधाम से बहिन कि शादी कर दी थी व घर कि आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो गई थी ।
बुद्धि प्रकाश जान गया था कि सात रोटी से सात चुड़ैल बहिन डर रही है इसलिए कुछ न कुछ देकर विदा कर देती है वह तीसरी बार भी कुआं के अंदर पहुंच गया था उसने फिर से कहा था एक खाऊं कि दो खाऊं कि तीन खाऊं कि सारी ही खा जाऊं तब तीसरी चुड़ैल बहिन प़कृट हुई थी उसने कहा था कि हमें मत खाना देखो मैं तुम्हें एक जादुई छड़ी देती हूं उसे हर दिन एक बार हवा में घुमाना तब वह तुम्हें एक किलो सोना देगी ।
बुद्धि प्रकाश खुशी खुशी जादू कि छड़ी लेकर आ गया था अब उसका कच्चा घर महल जैसा बन गया था घर में नोकर चाकर सब कुछ थें जिदंगी अच्छे से गुजर रही थी पर उस राज्य के राजा को एकाएक इतना धन महल देखकर जलन हो रही थी वह सब कुछ हड़पने कि योजना बना रहा था जिसका बुद्धि प्रकाश को पता चल गया था तभी तो वह पुनः कुआं के अंदर पहुंच गया था फिर उसने वहीं रोटियां निकाल कर कहा था कि एक खाऊं या दो खाऊं या फिर सारी ही खा जाऊं तभी चौथी चुड़ैल बहिन प़कृट हुई थी उसने कहा था कि देखो हमें मत खाना में जानती हूं कि तुम्हारे राज्य का राजा तुम्हारा धन हड़पने वाला है मैं तुम्हें जादू कि तलवार देती हूं इसमें से दिव्य ज्योति निकालती है जिससे शत्रुओं कि आंखों में अंधेरा छा जाता है और वह मैदान छोड़कर भाग खड़े होते हैं बुद्ध प्रकाश खुशी खुशी जादू कि तलवार लेकर आ गया था जैसा कि राजा सब कुछ हड़पने वाला था तभी तो उसने आक्रमण कर दिया था पर उसकी सेना जादू कि तलवार के सामने ंनहीं टिक पाई थी वह भाग खड़ी हो गई थी ।
फिर से वह कुआं के अंदर पहुंच गया था उसने फिर से कहा था कि एक खाऊं कि सारी खा जाऊं तभी पांचवीं चुड़ैल बहिन प़कृट हुई थी जिसने उस से कहा था कि हमें मत खाना देखो तुम्हें में उड़न खटोला दें रहीं हूं जिस पर बैठ कर तुम सारे संसार कि आसमां में उड़कर यात्रा कर सकते हों वह खुशी खुशी उड़न खटोला पर बैठकर आसमान से अपने महल कि छत पर आ गया था अब बुद्ध प्रकाश के पास हर प्रकार कि सुख सुविधा थी पर चूंकि उसकि शादी नहीं हुई थी वह पड़ोसी राज्य के राजा कि राजकुमारी बहुत ही खूबसूरत थी व गुड़ी थी उसके खूबसूरत होने के चर्चे सारे संसार में जंगल कि आग कि तरह फैले हुए थे चूंकि राजकुमारी कि एक शर्त थीं जो भी राजा या राजकुमार उसे युद्ध में हरा देगा उसे ही वह पति रूप में चुनाव कर लेगी राजकुमारी कुशल योद्धा थी शस्त्र कला में निपुण थी साथ ही उनके पास युद्ध कौशल में निपुण घोड़ी थी जो पलक झपकते ही आसमान में उड़ जाती थीं जिसके पंख थे फिर उनके पास हर प्रकार से सुसज्जित विशालकाय सेना थी कुछ राजकुमारों ने युद्ध भी किया था पर वह जीत नहीं पाए थे बुद्ध प्रकाश पांच चुड़ैल बहिनों से उपहार में कटोरा,जादू कि छड़ी, जादू कि तलवार, उड़न खटोला,एक हजार सोना के सिक्के,ले आया था वह फिर से कुआं के अंदर पहुंच गया था उसने फिर से रोटी का पिटारा खोल दिया था व कहने लगा था कि एक खाऊं या दो खाऊं या फिर सारी कि सारी खा जाऊं तभी छठवीं चुड़ैल बहिन प़कृट हुई थी उसने कहा था देखो मुझे मालूम है कि तुम राजकुमारी से विवाह करना चाहते हों राजकुमारी बहुत बड़ी कुशल योद्धा हैं उनके पास आसमान में उड़ने वाली घोड़ी भी है हम तुम्हें जादू बाला घोड़ा देते हैं जो आसमान में उड़ सकता है फिर वह घोड़ा बहुत ही सुन्दर है जिसे देखकर घोड़ी मोहित हो जाएगी वह अपना युद्ध कौशल भूल जाएगी छठी बहिन कि बात पूरी हुई थी जादू बाला घोड़ा भी प़कृट हो कर हुक्म मेरे आका कह रहा था फिर सातवीं चुड़ैल बहिन प़कृट हुई थी उसने कहा था तुम्हें में दुल्हन के लिए हीरों का हार दे रही हूं जिसके हीरे अनमोल हैं बुद्ध प्रकाश खुशी खुशी यह सब लेकर अपने महल में आ गया था ।
बुद्धि प्रकाश ने राजकुमारी के पास युद्ध का संदेश भेज दिया था दोनों ही और से घनघोर युद्ध हुआ था चूंकि वह भी जादू जानती थी उसने हर प्रकार से युद्ध लडा था पर उसकी घोड़ी जादू घोड़ा पर मोहित हो गई थी फिर बुद्ध प्रकाश के पास जादू तलवार थी उड़न खटोला था उसने सभी का इस्तेमाल किया था राजकुमारी ने हार मान ली थी फिर दोनों का खुशी खुशी व्याह हो गया था बुद्ध प्रकाश अब बड़े राज्य का राजा बन गया था वह रानी के साथ खुशी जीवन व्यतीत कर रहा था ।
समाप्त
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1 thought on ““सात चुड़ैले” लोक कहानी”

  1. यह एक लोक किस्सा है जो कि बचपन में हमारी दादी ने हमें सुनाया था दादी तो प्रभु के पास बीस साल पहले ही पहुंच गयी थी पर उन्होंने जो हमें हमारी नींद के लिए थपकियां देकर किस्सा सुनाया था वह आज भी याद है उन्हें याद कर के ऐसा लगता है कि मेरे पास मेरी दादी मुझे थपकियां देकर आज भी मुझे किस्सा सुना रही है

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