लखटकिया किस्मत के धनी मूर्ख कि लोक कथा

a8a312b2dcf7a8e0171f011246714862 fa008693 abf1 4fd0 9e1e

 पुराने समय कि बात हैं एक गांव था उस गांव में एक गरीब भोला नाम का अपने परिवार के साथ रहता था परिवार में माता पिता बेटा बहू ही रहते थें वह सारे दिन मेहनत मजदूरी कर के  व जंगल से लकड़ी काटकर भरण पोषण कर रहा था लड़का मां का बहुत ही आज्ञाकारी पुत्र था  जैसा मां कहती वह वहीं करता था उसकि पत्नी मायके गई हुई थी उससे मां ने कहा था बेटा बहुत दिन हो गए हैं तुम जाकर बहू को मायके से वापस घर लें आना क्यों कि में तो तुम्हारे पिता जी सारे दिन मजदूरी करते हैं  वापस घर आते आते में थक जाती हूं फिर घर पर आकर खाना पकाना व अन्य काम करने से और थक जाती हूं इसलिए तुम कल सुबह ससुराल निकल जाना ।

सुबह से ही मां ने खाना बना कर पैक कर दिया था  फिर झोले में खाना  रखकर कहां था बेटा रास्ते में कहीं भी कुआं मिलें तब वहां दोपहर का भोजन करना और फिर कही रास्ते में कोई भी देव स्थान दिखाई दे तब दर्शन जरूर करना फिर जिस जगह मतलब रास्ते में  सूर्य देव अस्त हो वहीं रात्रि विश्राम करना फिर सुबह आगे कि यात्रा करना आदि निर्देश दिए थे ।

भोला मात भक्त था मां के सारे निर्देशों को ध्यान में रखकर उसने मां कि चरण बंदना कि थी फिर ससुराल पत्नी को लेने चला गया था चूंकि उस जमाने में मोटरसाइकिल,कार, नहीं थीं न ही अच्छी सड़कें थीं आवागमन हेतु घोड़े, खच्चर,बैल गाड़ी,का, ज्यादा इस्तेमाल होता था पैसे वाले घोड़े का इस्तेमाल करते थे फिर मध्यम वर्ग के लोग खच्चर या बैल गाड़ी का इस्तेमाल आवागमन हेतु करते थे व गरीब आदमी पैदल ही दूर दूर कि यात्रा करते थें भोला गरीब था फिर स्वाभाविक था उसने पैदल यात्रा ससुराल जाने के लिए कि थीं चलते चलते जंगल पहाड़ को लांघ कर मैदानी इलाके में पहुंच गया था आगे चलकर उसे कुआं दिखाई दिया था जिसमें अंदर पानी पीने के लिए सीढ़ियां लगी हुई थी उसने दोपहर का भोजन यही करने का निश्चय किया था भोजन कर वह थोड़ी आगे चला था तब उसे बट वृछ दिखाई दिया था उसके पास खंडर नुमा मकान दिखाई दिया था बगल में चबूतरा पर किसी देव स्थान दिखाई दिया था शायद किसी देवता कि पत्थर कि मूर्ति थीं उसने मूर्ति के सामने सिर झुका कर बंदना कि थी  फिर खंडर नुमा मकान पर नजर डाली थी उस मकान के अंदर कुछ गधे आराम कर रहे थे उन्हें देखकर वह आगे कि यात्रा करते हुए सूर्य अस्त होने के समय पर ससुराल के घर के पीछे पहुंच गया था चूंकि मां का निर्देश था तब उसने घर के पीछे ही रात्रि विश्राम किया घर के अंदर सास और उसकी पत्नी में बात चीत हो रहीं थीं 

उसकी सास :- बेटा शाम का खाना खा लें देखो मैंने कड़ी चांवल पकाएं हैं साथ ही तली हुई मिर्ची आम कि चटनी पीस कर रख दी है 

पत्नी :- नहीं मां रोज रोज कड़ी चांवल खा खा कर मन भर गया है मुझे नहीं खाना ।

सास पत्नी कि मां :- बेटी आठ रोटी भी रखी हुई है जो तेरे भाई व पिता के लिए हैं ऐसा कर तूं उसमें से दो रोटी ले लेना ।

भोला घर के अंदर का सारा बाक्या सुन रहा था जैसे ही सुबह सूर्योदय हुआ था वह ससुराल घर के मुख्य दरवाजे पर पहुंच गया था दामाद को एकाएक आ जाने से सारा परिवार खुश हुआ था सास ससुर साला आवभगत में लग गए थे उसकी पत्नी भी इधर उधर से ताक झांक कर रही थी व अपने कजरारे नैना से उसे घायल कर रही थी नित्य कर्म से निवृत्त होकर उसकी सास ने दामाद से कलेवा सुबह का नाश्ता करने का कहा था तब भोला ने कहा था आप के घर में बासी कढ़ी चावल रखें हुए हैं में नहीं खा सकता ।

तुम्हें कैसे पता सभी ने एक साथ पूछा था 

बस सब प्रभु कि कृपा है 

और क्या क्या रखा हुआ था सास ने फिर से पूछा था 

तुम्हारे घर पर आठ रोटी भी बनी हुई थी फिर आटा नही था घर में अनाज भी नहीं हैं तली हुई मिर्ची के साथ आम कि चटनी भी पीस कर रखीं हैं ।

अब क्या थोड़े ही देर बाद जंगल कि आग जैसे यह खबर चारों दिशाओं में फैल गई थी कि भोला मतलब गांव का दामाद ज्ञानी है वह सब कुछ जानता है मतलब पल भर में अपने तीसरे नेत्र से सब कुछ जान जाता है ।

गांव के कुम्हार के गधे कहीं भटक मतलब खो गये थें वह दौड़ा दौड़ा आ कर भोला के सामने हाथ जोड़कर बोला था दामाद जी मेरे गधे गायब हो गए हैं आप क्या बता सकते हैं ?

भोला चूंकि खंडर में गधों को देखकर आया था फिर भी वह कुछ देर बाद बताना चाहता था तभी तो आंखें बंद कर ओंठ से कुछ बुदबुदाते हुए जैसे कि कोई मंत्र पढ़ रहा था फिर उसने कुम्हार से कहां था गधे तो मिल जाएंगे परन्तु 

परन्तु क्या कुम्हार ने कहा था 

देवता को पूजा देनी होगी मतलब पांच सोने के सिक्के 

कुम्हार ने पांच सोने कि असर्फी भोला के हाथ पर रख दी थी फिर भोला ने दिशा दूरी खंडर सब कुछ समझा कर उसे रवाना कर दिया था कुम्हार के गधे मिल गये थें ।

अब तो यह बात राजा के पास पहुंच गयी थी कि गांव का दामाद ज्ञानी है भूत भविष्य वर्तमान सब कुछ जानता है राजा ने उससे मिलने का निश्चय किया था फिर कारण भी था चूंकि रानी का हीरो का हार कहीं गुम हो गया था उसे उन्होंने सभी तरह से खोजा गया था पर कही भी नहीं मिल रहा था रानी को यह हार बहुत ही प्यारा , खूबसूरत लग रहा था वह रूठकर कोप भवन में बैठी हुई थी अन्न जल भी कभी कभी ही लेती थी रानी के रूठने पर राजा बहुत ही परेशान थें तभी तो राजा ने सेना के कुछ जवानों को भोला को लाने के लिए भेजा था ।

भोला को राजदरबार में आसन दिया गया था सारा दरबार मंत्री राज पुरोहित आम जनता से खचाखच भरा हुआ था राज पुरोहित ने गम्भीर आवाज में भोला से कहा था आप हमारे गांव के दामाद हो इस नाते इस राज्य के दामाद हुए सुना है कि आप बहुत ही ज्ञानी है महारानी का हार कहीं चोरी  हो गया है अगर आप ने बता दिया तब आप को ईनाम भी मिलेगा साथ ही नौकरी अगर नहीं पता बताया तब सजा भी मिलनी है ।

भोला सोच में पड़ गया था मन ही मन में विचार किया कुछ दिन कि मोहलत ले लेता हूं फिर मौका देखकर पत्नी के साथ इस राज्य कि सीमा से दूर भाग जाऊंगा उसने राजा से विनय भरे लहजे से कहा था हजूर मुझे एक हफ्ते का समय चाहिए क्योंकि मुझे ध्यान लगाना होगा ।

राजा ने उसे समय सीमा दे दी थी फिर वह बड़ी ही चिंता से घर पहुंचा था उसे अपना बड़बोलापन खल रहा था झूठ बोल कर अपनी वाहवाही लूटने से चिढ़ हो रही थी पत्नी ने पूछा था कि तुम्हारा चेहरा उदास क्यों है मुझसे कहो ?

रात्रि में चिंता से नींद नहीं आ रही थी उसके घर के बगल में नाई का घर था दीवाल से दीवाल जुड़ी हुई थी नाई कि पत्नी पति से बात कर रही थी कि देखो मैंने पहले ही बोला था कि मुझसे रानी के हार कि चोरी मत करवाओ पर तुम नहीं मानें अब देखो गांव का दामाद ज्ञानी है सुनते हैं कि राजा साहब ने उसे बुला कर हार खोजने का कहा हैं वह तो सब कुछ बता देगा फिर हमें राज दंड मिलेगा अब क्या करूं ।

उसकी यह बात सुनकर उसका पति बोला था अरे तुम इतनी चिंता क्यों करती हो रानी का हार गुसलखाना में पत्थर के नीचे छुपा देना ।

भोला का इतना सुनना था कि उसकि बाछे खिल उठी थी लम्बे पैर पसार कर सोया हुआ था जैसा कि राजा साहब ने एक सप्ताह का समय दिया था पूरा हो गया था राजा के दूत घर पर आ गये थें उसने भाव खाकर कहा था कि जाकर राजा साहब को संदेश देना कि राजकीय सम्मान के साथ जाउंगा फिर क्या था राजा साहब ने हाथी घोड़ा पालकी सेना कि टुकड़ी भेजी थी महल के मुख्य दरवाजे पर खुद स्वागत हेतु खड़े हुए थे आज फिर से राजदरबार खचाखच भरा हुआ था भोला को राजपुरोहित महामंत्री के बगल में कुर्सी दी गई थी कुछ देर तक भोला कुछ मन ही मन में विचार करता रहा था वह अपने हाथ कभी हवा में उठाता फिर नीचे कर के कोई मंत्र जोर जोर से बोलता था सहसा गुसलखाना गुसलखाना रानी का गुसलखाना उसमें पत्थर उसके ंनीचे लखटकिया हार रखा गया था कहने लगा था फिर क्या था थोड़ी देर बाद ही हार मिल गया था राजा साहब ने उसे इनाम में एक लाख सोना के सिक्के दिए थे व राजदरबार में नौकरी ।

सच में जब किस्मत मेहरबान होती है तब मूर्ख भोला जैसी चमक जाती है?। 

Advertisementsn

1 thought on “लखटकिया किस्मत के धनी मूर्ख कि लोक कथा”

  1. यह कहानी बचपन में दादी ने प्यारी सी थपकियां देकर सुनाई थी जो कि किस्मत पर आधारित है इस कहानी को याद करते हुए ऐसा लगता है कि दादी हमारे पास है जो हमें आज भी थपकियां देकर किस्सा सुना रही है ।

Comments are closed.

Share via
Copy link