“मुक्ती आर्थिक स्थिति से जूझ रहे परिवार कि कहानी

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यूं  मुक्ति के अनेकों अर्थ है यानी मुक्त होने के जैसे कि कर्ज से मुक्ति,मन कि चिंता से मुक्ति, ,जीवन से मुक्ति इत्यादि पर ठाकुर साहब उस थकाऊ नौकरी से मुक्ति पाना चाहते थे जहां पर समय का कोई भी हिसाब किताब नहीं था , जहां का स्टाफ के कुछ सदस्यों को इंसान से कोई भी लेना देना नहीं था उसका कारण यह था कि बे कंपनी कि तरफ से पड़  लिखे इंजीनियर थे यानी किसी के पास सिविल इंजीनियर का डिप्लोमा था या फिर डिग्री पर भले ही धरातल पर काम करने में बे सब जीरो थे पर कंपनी के अफसर उन्हें ही ज्यादा इज्जत देते थे  उन्हें ही ज्यादा पावर दिए गए थे जैसे कि सुपरवाइजर फोर मेन से ज्यादा से काम लेना मजदूरों को इंसान नहीं समझना , ठेकेदार से कमिशन लेंना आदि

ठाकुर साहब कंट्रक्शन कंपनी में सीनियर सुपरवाइजर थें उनका नाम नरेंद्र सिंह ठाकुर था बड़े ही सरल हृदय व दयालु थे साथ ही मेहनत कश कर्मठ, ईमानदार इसी के कारण वह मालिक लोगों के खासमखास थें उन्हें बहुत सारी जिम्मेदारी दी गई थी जैसे कि मटेरियल पर नजर रखना उसकी क्वालिटी चेक करना साइट कि अन्य व्यवस्थाएं फिर कंट्रक्शन के हर आइटम कि क्वालिटी कंट्रोल करना इत्यादि हालांकि उनके पास कोई भी डिग्री डिप्लोमा नहीं था पर प्रेक्टिकल ज्ञान बहुत था बड़े बड़े फार्मूला याद थें पल भर में सरिया सेटिंग कि क्वान्टिटी निकाल देते हैं फिर चाहे सीमेंट का मिक्स हो या फिर इट सीमेंट कि जुड़ाई  डम्पी लेवल में बे मास्टर थे नेशनल हाईवे कि साईट पर अनेक किलोमीटर का एन जी एल उठाकर लेवल सीट अपने प्रोजेक्ट मैनेजर को दे देते थे पर उनकी इतनी सारी हुनर कि कोई भी वेल्यू नहीं थी कारण यही था कि उनके पास कोई डिग्री का कागज का टुकड़ा नहीं था सभी लेवल सीट पर इंजीनियर के ही साइन मान्य थें यहीं कारण था कि उनके बीस साल के कठोर परिश्रम में भी बे पच्चीस हजार रुपए में ही काम कर रहे थे ।मजे कि बात यह थी जो युवा इंजिनियर बन कर आ रहें थें जिन्हें प्रेक्टिकल ज्ञान न के बराबर उन्हें सर कह कर संबोधित कहना पड़ता था व उनके अंडर में काम करना पड़ता था हाईराइज बिल्डिंग का प्रोजेक्ट था दसवें माले पर स्लेव कास्ट करने कि तैयारी हो रही थी ठाकुर साहब सरिया डाइंग के हिसाब से चेकिंग कर रहे थे कहीं कहीं उन्हें बहुत सारी कमियां नजर आइ थी जैसे कि रिंग कि  स्पेसिंग ज्यादा होना बीम में एक्स्ट्रा सरिया न डला वेंट अप कि सही डिग्री न कवर नहीं लगना आदि चूंकि ठेकेदार का विथ मटेरियल काम था उनका माथा ठनका उन्होंने मोबाइल निकाल कर बहुत सारे फोटो खींच कर रख लिए थे फिर ठेकेदार के फोरमैन को काल कर बुलाया था उनके बीच बातचीत हो रही थी जो इस प्रकार से थी 

ठाकुर साहब :- फोरमैन जी सरिया ऐसे ही बांधा जाता है क्या डाइंग नहीं थीं या फिर पड़ना नहीं आती ।

फोरमैन :- सर मुझे जो बी बी एस दी गई थी उसी के हिसाब से सरिया डाला व बांधा ।

ठाकुर साहब :- आपको बी बी एस किसने दी थी ।

फोरमैन :- जो नया साहब आया है न उसने मतलब अय्यर सर 

ठाकुर साहब :- जेब से पुनः फोन ंंनिकाल कर सर जरा इधर आइए दसवें माले पर हां हां सरिया आप ने …. हां हां बी बी एस जी जी 

अय्यर को कंपनी कैम्पस से ही लेकर आई थी स्वभाव से अकडू था साथ ही एम टेक डिग्री का घमंड था थोड़ी देर बाद वह सिगरेट के छल्ले उड़ाता हुआ आ गया था ।

ठाकुर साहब :- केसे हो सर 

अय्यर :-एकदम चकाचक अपनी ही बात पर हंस दिया था 

ठाकुर साहब :- यह सब सरिया तो गलत बंध गया है न कहीं एक्स्ट्रा वार डले ही स्पेसिंग सही ंनहीं है  कवर भी लगें हुए नहीं हैं आपने चेक नहीं किया क्या फिर आपकी बी बी एस भी गलत बनी हुई है मेंने दूसरी साईट से पंप मंगा लिया है प्लांट पर आर्डर कर दिया है छत रोकनी पड़ेगी ।

ठाकुर साहब का इतना कहना था कि अय्यर कि भाषा बदल गई थी तख्त लहज़े में बोला था इंजीनियर में हूं कि आप 

ठाकुर साहब :- आप 

अय्यर :-तब आप कोन होते हैं छत कि कास्टिंग रोकने वाले ।

ठाकुर साहब :- श्री मान जी में भी कंपनी का कर्मचारी हूं सेठ मुझे भी तनख्वाह देता है जिस से हमारा घर चलता है फिर मुझे भी काम आता है बड़े बड़े स्ट्रक्चर इंजीनियर के साथ में काम किया है ऐसी बी बी एस पल भर में बना दूंगा समझें यह बाल एसे ही नहीं पके हैं उन्हें भी गुस्सा आ गया था ।

अय्यर :- अच्छा यह बात हैं तब छत आज ही भरेगी जेब से मोबाइल फोन निकाल कर उसने प्रोजेक्ट मैनेजर को लगाया था फिर अंग्रेजी भाषा में बात चीत हो रहीं थीं थोड़ी देर बाद ठीक है सर में बात कराता हूं साउंड खोलकर फोन ठाकुर साहब को दे दिया था हां भाई मिस्टर ठाकुर क्या परेशान हैं 

सर सरिया सही नहीं बंधा हुआ हैं  दूसरी तरफ से क्या दिक्कत है देखो उन्नीस बीस चलता है 

सर उन्नीस बीस तो चलता है पर इक्कीस नहीं छत नहीं भर सकतीं आप कहें तो फोटो भेजूं 

नहीं कोई जरूरत नहीं फिर आप अपनी डेढ़ अक्ल मत लगाओ समझें अरे भाई आल रेडी इंजीनियर काम करा रहा है उसके काम में आपको इंटरफेयर नहीं करना चाहिए बहुत प्रेशर हैं 

पर सर प्रेशर हैं तब इसका मतलब यह है कि कुछ भी कैसा भी उल्टा सीधा काम हों और हम आंख बंद करके चुपचाप रहे नहीं ऐसा नहीं होगा ठाकुर साहब ने प्रतिउत्तर में कहां था 

मिस्टर बहुत सुन ली आपकी बकवास आप पंप सेट कराएं समझें छत आज ही भरेगी यह मेरा आदेश हैं इतना कहकर प्रोजेक्ट मैनेजर ने फोन काट दिया था अब अय्यर के चेहरे पर विजय से भरे हुए भाव थें मूंछ को मोड़ता हुआ उन्हें चिढ़ा रहा था यहां पर ठाकुर साहब को अपनी बेइज्जती महसूस हुई थी साथ ही गुस्सा इस बात पर आ रहा था कि एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी उन्होंने सारी फोटो कंपनी मालिक को सेंड कर दी थी व उन्हें फोन कर फोटो अभी देखने का निवेदन किया था कुछ शब्दों में सारा सार बयां कर दिया था पर अय्यर अभी भी मुस्कुरा रहा था शायद उसे अपनी जीत का भरोसा था पर यह क्या अय्यर के पास प्रोजेक्ट मैनेजर का वापस फोन आ गया था जिसे वह झिड़क रहा था धमकी दें रहा था कि काम पर ़ध्यान दिजिए वर्ना बाहर कर दूंगा समझें सरिया सही करवाइए व भी आज आप जब तक पूरा काम नहीं हो घर नहीं जाओगे समझें 

अय्यर का चेहरा देखने लायक था चेहरे पर पसीना आ रहा था ठेकेदार के फोरमैन से विनम्र निवेदन किया कि भैया सरिया खोल कर सही करना होगा तभी छत भरेगा पर वह तैयार नहीं हो रहा था उसका कहना था मेरे नुकसान कोन देगा ??

तब ठाकुर साहब ने अपना बढ़ा मन दिखाते हुए कहा था कि सर तो अभी अभी इस फील्ड में आए हैं तू तो पुराना है माना कि उन्होंने बी बी एस गलत बना कर दी थी पर मुझे तो दिखाना था अब तू ही सरिया ठीक करेगा ।

इस विषय के बाद स्टाफ दो धड़ों में बट गया था एक धड़ा था इंजीनियर का दूसरा सुपरवाइजर  प्रोजेक्ट मैनेजर ने हर प्रकार से ठाकुर साहब को परेशान करने का मन बना लिया था जैसे कि लेट नाइट तक रोज काम करवाना फिर सुबह आठ बजे वापस साइट पर आना उनकी दिनचर्या बदल गई थी घर पर लेट नाइट जातें थें थक जाते थें  अन्दर ही अन्दर परेशान थें पर परेशानी किस से कहें चुंकि शहर में किराए के मकान में रहते थे कमाने वाले अकेले ही थे सारे परिवार का बोझ उठाना पड़ता था दो बच्चे थें बढ़ी बेटी जो एम् एस सी  में थी साथ ही पी एस सी कि तैयारी कर रही थी पड़ने में बहुत ही तेज थी फिर बेटा अभी बारहवीं में पढ़ता था  ऐसे में नौकरी करने कि मजबूर थीं पर धर्म पत्नी कहती थी आप मालिक से बात क्यों नहीं करते उन्हें अपनी परेशानी क्यों नहीं बताते हों सकता है कुछ हल निकल जाएं ।

धर्म पत्नी के कहने पर उन्होंने मालिक से बात कि थीं पर उन्हें यह कह कर तसल्ली दे दी थी कि ठाकुर साहब आप हमारे पुराने भरोसे मंद कर्मचारी है आप को तो मालूम ही है कि यह गवर्नमेंट का प्रोजेक्ट है समय सीमा ंंतय है अगर हमने तय सीमा में प्रोजेक्ट सरकार को हैंड ओवर नहीं किया तब जुर्माना भरना होगा जो करोड़ों में होगा भाई काम तो करना ही होगा और हा साइट पर प्रोजेक्ट मैनेजर हैं जी एम् साहब हैं उनसे बात किजिए में उनके काम में हस्तक्षेप नहीं करता ।

आज ठाकुर साहब को अपनी ईमानदारी पर खुद ही तरस आ रहा था काश अगर मक्कार कमीशनखोरी कि होती तब आज खुद का मकान होता कार होती व खुद किसी कंपनी के मालिक बन गए होते उन्हें याद आया कि कुछ पुराने साथी  कितने पैसे वाले बन बैठे है पर उन्हें तो इमानदारी का भूत सवार था मालिक कि वफादार कहलाने के लिए कान तरसते थे क्या जरूरत थी चुगली करने कि अब भुगतो उनकी आत्मा कह रहीं थीं फिर कहते हैं कि तालाब में रहना है तब मगरमच्छ से बैर नहीं करना चाहिए ।

लगातार लम्बी लम्बी ड्यूटी करने से ठाकुर साहब थक गए थे कभी कभी इससे मुक्त होने कि सोचते थे कभी कभी सड़क किनारे चाय का खोमचा खोलने कि सोचते थे तब कभी सब्जी का व्यापार करने का मन बनाते थे पर हिम्मत नहीं कर पाते थे मन में शंका रहती थी कि कहीं अगर धंधा नहीं चला तब परिवार का भरण पोषण कैसे होगा बच्चों कि पढ़ाई कैसे पूरी होंगी नहीं नहीं तू ऐसा मत सोच तुझे नौकरी करना ही होगी करना ही……..

उस दिन छत भरने कि  लू के थपेड़ो में उन्होंने तैयारी कि थी शरीर थक गया था शायद लूं लगने से बुखार था शरीर आराम मांग रहा था  पर शाम को प्रोजेक्ट मैनेजर का फोन आया था आप को ही आज फुल रात रूकना हैं टाप फ्लोर कि छत भरने जा रहे हैं कोई ग़लती नही होना चाहिए ….  प्रतिउत्तर में कहां सर तबियत बिगड़ी है मैं आज ंनहीं रूक सकता किसी दूसरे को …… बात पूरी भी नहीं हुई थी कहा गया था आप ही रूकेगा यहां बहाना बाजी नहीं चलेगी समझें ….

अर्ध रात्रि का समय था छत पर चहलपहल थी लाइट हैलोजेन का प्रकाश दूर दूर तक अंधेरे को चीर रहा था मस्त मस्त ठंडी व्यार चल रही थी और ठाकुर साहब ज्वर से कांप रहें थें उन्होंने साथियों से कहा भाई बहुत ठंड लग रही है ऐसा लग रहा  जैसे यमराज के दूत आस पास ही हाथों से तलवार ले कर नांच रहें हों लगता है अब नहीं  ….. शायद अब हमें इस उबाऊ नौकरी से मुक्ति मिल जाएगी अरे भाई जरा कोई तो मेरे घर पर फोन कर दिजिए में अंतिम समय अपने परिवार से मुलाकात करना चाहता हूं देखो देखो मेरी बिटिया पुलिस अधीक्षक कि वर्दी में दिख रही है आह वेटी तूने मेरा गर्व से सिर ऊंचा कर दिया आह बड़बड़ाने लगें थें ठाकुर साहब साथियों ने सब जगह फोन कर सूचना दी थी प्रोजेक्ट मैनेजर, कंपनी मालिक,सारा स्टाफ परिवार अस्पताल पहुंच रहा था पर ठाकुर साहब तों मुक्त हो कर परमेश्वर के पास पहुंच गए थे ..

पर कंपनी कि और से कुछ लाख रुपए परिवार को दिए गए थे उनकी ईमानदारी , थकाऊ नौकरी के लिए ।

समाप्त 

  

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1 thought on ““मुक्ती आर्थिक स्थिति से जूझ रहे परिवार कि कहानी”

  1. यह कहानी श्रम पर लिखी गई है क्योंकि मौजूदा समय में कुछ कंट्रक्शन कंपनी श्रमिकों का शोषण कर रहे हैं इंसान को इंसान नहीं समझा रहे हैं

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