“सबला”कविता.

 में ऐक आधुनिक युग कि नारी हूं में अबला नहीं सबला कहलाती हूं  मे उड़ाती हूं फाइटर प्लेन और चलातीं हूं  पानी के जहाज ! ट्रेनिंग लेकर थामती हूं हाथों में हथियार  करतीं हूं देश कि सीमाओं पर  दुश्मन का  संहार  रखतीं हूं मां भारती कि लाज क्यों कि मैं ऐक नारी हूं । सदियों … Read more

“सबला”कविता.

 में ऐक आधुनिक युग कि नारी हूं में अबला नहीं सबला कहलाती हूं  मे उड़ाती हूं फाइटर प्लेन और चलातीं हूं  पानी के जहाज ! ट्रेनिंग लेकर थामती हूं हाथों में हथियार  करतीं हूं देश कि सीमाओं पर  दुश्मन का  संहार  रखतीं हूं मां भारती कि लाज क्यों कि मैं ऐक नारी हूं । सदियों … Read more