वह अल्हड़ निराली लड़की

 चाल निराली आली तोरी और निराली बोली तोरी कैश निराले फैलें कारे कारे चेहरे के चहुं ओर है सारे बने फिरत है धन सावन के। नयन निराले कजरारे से बड़े बड़े सीधे सादे से भोहो के धनुष बने से चलत फिरत है जब तिरछे से तीर बनें हैं और मदन के गाल निराले भरे भरे … Read more