भादों का महिना था शाम से ही मेघ गर्जन करते हुए मूसलाधार बारिश कर रहे थे शहर कि सड़कों पर पानी ही पानी नजर आ रहा था इस मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त था निचली बस्तियों में पानी घरों कि दहलीज से अन्दर प्रवेश कर रहा था  जहा ऐसी घनघोर वर्षा से कुछ लोग परेशान थें वही कुछ लोग ऐसे सुहावना मौसम का आनन्द ले  रहे थे शहर कि शराब दुकानों पर भीड़ थी बार अहाता पियक्कड़ों से भरें हुए थे ऐसे ही मौसम में राजू ने ए सी आहता मे प्रवेश किया था उसने खोजी निगाह से मुआवना किया था दर असल वह खाली टेबल खोज रहा था उसकि खोज पूरी हुई थी दर असल एक टेबल पर एक ही सज्जन शराब के पैग हलक में उतार रहे थे  चेहरे से धनाढ्य लग रहें थे जैसे कि अधेड़ अवस्था में भी चेहरे पर तेज था रो बिला था  चेहरे मोहरे से ही पैसा वाले दिखाई देते थे राजू ने व्हिस्की व्हिस्की कि बोतल टेबल पर रख कर कहा जी नमस्ते भाई साहब 

हां हां नमस्ते सज्जन पुरुष ने राजू के उपर सरसरी निगाह डाल कर कहा था ।

क्या मैं यहां बैठ सकता हूं राजू ने कहा 

जी बिल्कुल आप बैठिए  

राजू ने वेटर को सोड़ा गिलास भुना हुए चना मूंग दाल  लाने को कहा था सब कुछ आने के बाद उसने अपने लिए एक लार्ज पैग व्हिस्की का बनाया था फिर गटागट पी गया था सेब से सिगरेट का पैकेट निकाल कर उसने सामने वाले सज्जन से कहां था 

सिगरेट चाचा जी 

हा भाई 

दोनों के नथूने से धुआं निकल रहा था फिर राजू ने दुसरा फिर तीसरा पैग हलक में उतार लिया था अब उसके सिर पर शराब का शुरूर छाने लगा था चलिए आप सब को राजू का परिचय करा दूं राजू पच्चीस साल का खूबसूरत जवान था लम्बा कद काठी भरी हुई देह गोरा चिट्ठा चेहरे लुभावना  आत्म विश्वास से भरा हुआ जो उसके व्यक्तित्व को आकर्षक बनाता था पहली ही नजर में वह दूसरों के दिलों में जगह बना लेता था अहाता का अन्दर का नजारा अब रंगीन हो रहा था पियक्कड़ आपस में बात चीत कर रहे थे कोई अपनी प्रेमिका से प्यार का इज़हार कर रहा था तब कोई अपने धन कि डींगे हांक रहा था कोई अपने आप को पहलवान बता रहा था फिर कोई अपनी पत्नी से लड़ रहा था खैर उन दोनों में भी बात चीत होने लगी थी दोनो ही घुल मिल गए थे ऐसा लगता था कि जैसे बरसो का याराना हो तभी राजु का मोबाइल फोन चिल्लाने लगा था 

हेलो  हा बोलिए हां हां क्या सब्जी  हा हा मे ताजी मछली लेकर आता हूं हां हा तब तक तुम प्याज लहसुन मसाला तैयार कर लेना और हा मेरे साथ चाचा जी भी आ रहें हैं अपने घर पर ही खाना खाएंगे ठीक है सामने वाली उनकी धर्मपत्नी मिसेज बबली राजू थी ।

राजू ने लड़खड़ाते हुए सामने वाले सज्जन से कहा था देखिए भाईसाहब आज आप को मेरे घर पर भोजन करना है कसम से आप बहुत ही अच्छे हैं आप आज से हमारे मेहमान बनेंगे 

उसके एका एक निमंत्रण देने पर सामने वाले सज्जन थोड़े आश्चर्यचकित थें उन्होंने बहुत ही बहाना बनाकर टालना चाहा था पर राजू तो हाथ जोड़कर ही पीछे पड़ गया था उन्हें हा कहना ही पड़ी थी फिर क्या एक बोतल और ली गई थी आहता के बगल में ही मछली कि दुकान थी मछली भी खरीदी गई थी वह बात अलग थी कि पैसा सज्जन पुरुष ने ही दिए थे  थोड़ी देर बाद ही सज्जन पुरुष कार से उसके घर पहुंच गए थे बोरवेल बजते ही दरवाजा मिसेज बबली ने खोला था जिन्होंने हाथ जोड़कर कहा था ।

नमस्ते चाचा जी 

जी नमस्ते सज्जन पुरुष ने प्रतिउत्तर में कहा था।

चलिए अब आप को मिसेज बबली से परिचय करा दूं मिसेज बबली उच्च शिक्षित घरेलू महिला है उनका कद मध्यम है शरीर छरछरा कठोर सुडोल सीना चेहरा हल्का सा सांवला कंटीली आंखें उन्नत वक्ष , सुराहीदार गर्दन, शुतवा नाक वाए गाल पर हल्का सा तिल पतले गुलाबी होंठ ,कुल मिलाकर वह अप्सरा जैसी खुबसूरती बी खैर रहीं थीं राजू मिसेज बबली कि सुन्दर जोड़ी को देखकर ऐसा लगता था कि ऊपरवाला ने स्वर्ग से ही बनाई थी राजू दाल मिल में सुपरवाइजर था पगार भी ठीक ठाक थी शायद तभी तो वह धर्म पत्नी से कहीं भी नौकरी नहीं कराता था खैर उन का जो भी कारण हों ? पर आस पास पड़ोस में बहुत इज्जत थी  ।

रात्रि के दस बज रहे थे बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी दूर कहीं बिजली गिरी थी ,पास ही कहीं मेंढक अपना अलाप गा रहे थे उनके साथ सुर ताल झिंगुर दें रहें थें कही कही गली के आवारा कुत्ते भी भौंक रहे थे खिड़की  के बाहर नीम का पेड़ कांप रहा था और अंदर  किचन में जैसे कि प्याज लहसुन मसाला तैयार था मिसेज बबली मच्छी  पका रही थी चूंकि मकान मे किचन बैडरूम गुसलखाना ही था कारण आज काल छोटे परिवार के लिए ऐसे ही किराया पर देने हेतु विल्बर तैयार करते हैं तभी तो बैडरूम में ही राजू ने महफ़िल सजा दी थी  पैग पर पैग हलक में उतार लिए दे साथ ही बात चीत हो रहीं थीं 

राजू:- लड़खड़ाती जुबान से चाचा जी आप से मिल कर बहुत खुश हुआ हा हा अपना ही घर समझें ।

सज्जन पुरुष:- जी  बिल्कुल बिल्कुल तू हमारे बेटे जैसा हैं मतलब मेरा बेटा भी तेरी ही उम्र का हैं हा पिछले साल ही उसकी शादी कि हैं बेटा बहू दोनों ही रेलवे में  मुंबई में बड़े अफसर हैं और हमारा भी रियल एस्टेट का काम काज हैं ।

राजू:- जी बिल्कुल आप से मिल कर बहुत खुशी हुई आज से हम पक्के दोस्त  हुए ।

राजू बहक रहा था या फिर नाटक कर रहा था पक्का नहीं कहा जा सकता पर जो सज्जन पुरुष थें लगभग होशोहवास में थें  इस बीच मिसेज बबली कभी ठंडा पानी लाती थी कभी सलाद तब कभी मछली के फ्लाई किए मछली के पीस वह मुस्कुरा कर रख रहीं थीं  चूंकि सज्जन पुरुष को भी शराब ने अपने मकड़ जाल में फंसाया था तभी तो न लाख चाहते हुए भी बे उसके झीनी सी मैक्सी में यौवन के अथाह सागर को निहार रहे थे   सज्जन पुरुष के इस प़कार से देखने पर मिसेज बबली भी मंद मंद मुस्कान बिखेरते हुए मानों कि मूक निमंत्रण दे रहीं थीं खैर सभी ने खाना खा लिया था राजू अभी भी उलजलूल बक रहा था व उल्टी सीधी हरकतें करने लगा था जैसे कि बबली से छेड़छाड़ चूमा चाटी वह भी सज्जन पुरुष के सामने फिर उसने उसे अर्ध नग्न कर दिया था उसकी इस हरकत पर बबली ने उसे फटकार लगाई थी तुम्हें शर्म नहीं आती  तुम्हें ज्यादा नशा हों गया है घर में राशन पानी नहीं है गैस कि टंकी खत्म हो गई है और तुम शराब में पैसा खर्च कर रहे हों पर राजू तो विस्तर पर एक और करवट ले कर लेट गया था शायद उसे नींद आ रही थी ।

सज्जन पुरुष के मन के अन्दर बैठा जानवर जाग उठा था उन्होंने जल्दी से पर्स में से कुछ दो दो हजार के नोट निकाल कर बबली को दें दिए थे  कुछ देर बाद विस्तर पर खजुराहो कि कामुक कल्पनाएं  कामुक तस्वीरें जैसा फिल्मांकन किया जा रहा था  मिसेज बबली शाय़द काम कला में माहिर थी तभी तो हर प्रकार से सहयोग कर रही थी मतलब हर आसन का इस्तेमाल कर रही थी एकाएक राजू ने करवट बदली थी फिर आंख खोलकर कहा था कि यह पलंग क्यों हिल रहा है यह गर्म सांसें कैसी है यह सिसकारियां कैसे निकल रही है मेरी पत्नी किसी दूसरे के साथ …. उसके ऐसा कहने पर सज्जन पुरुष घबरा गया था तभी मिसेज बबली ने पति से कहा था तुम्हें सपने देखने कि आदत है न जाने कैसे कैसे सपने देखतो हों करवट बदल कर सौ जाइए सचमुच राजू करवट बदल कर खर्राटे भरने लगा था बाहर बिजली चमकी थीं फिर मेघ गर्जन कर रहे थे और अंदर वासना का नंगा नाच हों रहा था फिर वह कुछ देर बाद थम गया था थोड़ी देर बाद कपड़े पहन कर बबली ने कहा था आप मेरे बाप कि उम्र के आसपास हों पर आप ने तो बाप रे रोम रोम तृप्त कर दिया चाचा जी अब आप जाइए  फिर आना ।

सुबह कि दिनचर्या शुरू हो गई थी नित्य कर्म से निवृत्त हो कर नहा धो कर पति पत्नी देव स्थान दर्शन करने जा रहे थे रास्ते में जो भी जान पहचान वाले दिखाई देते थे दोनों ही हाथ जोड़कर नमस्ते भाई साहब कैसे हैं सब ठीक तो है हां हा मंदिर दर्शन करने जा रहा था मिसेज बबली महिलाओ से कहती थी दीदी आज चार बजे से सत्संग फलां फलां जगह पर होगा और हा बहुत बड़े संत आए हैं जो हमें सचित्र रहने का मार्ग प्रशस्त करेंगे और हा अपने अनमोल प्रवचन से हमें भगवान परमेश्वर के नजदीक जाने का मार्ग दिखाएंगे उन दोनों कि कालोनी में बहुत ही इज्जत थी लोग कहते बेचारे बहुत ही सज्जन पति पत्नी हैं बहुत ही भोले मिलनसार कुदरत ने कितनी खूबसूरत जौढी बनाई है ।

दाल मिल में भी राजू के सभ्य शुशील व्यवहार से सभी खुश थे सभी से हाथ जोड़कर नमस्ते भाई साहब कहता था  मालिक लोगों का खास था उसका कारण यह था वह अपने काम के प्रति इमानदार था कर्मठ था उसके आने से मिल का प्रोडक्शन बड़ गया था दालों कि क्वालिटी में सुधार हो गया था इसलिए उसका जल्दी जल्दी इंक्रीमेंट हों रहा था परन्तु उसका रात्रि में पर पुरुष को घर पर लाना फिर पार्टी करना समझ से बाहर था शायद उसके अंदर अंदरूनी कोई बीमारी थी या फिर शारिरिक संबंध बनाने में सक्षम नहीं था कह नहीं सकता ?

शाम का मौसम फिर रोमांटिक था मेघ समुद्र से जल भरकर प्यासी धरती को तृप्त कर रहे थे उन कि इस कृपा से पेड़ पौधे मोर जंगल के जीव जंतु नृत्य कर रहे थे सीमेंट कांक्रीट  के शहर जो गर्म  हो कर आग जैसे धधक रहें थें अब काफी हद तक ठंडे हो रहें थें ऐसे सुहावना मौसम में पियक्कड़ों से  शराब कि दुकानों में भीड़ थी आहता ठसाठस भरे हुए थे राजू भी शराब कि बोतल लेकर आहता मे प्रवेश कर गया था उसने खोजी निगाह से हर शख्स का मुआवना किया था फिर उसकी खोजबीन पूरी हुई थी एक टेबल पर अकेले साठ बरस के सज्जन पुरुष बैठ कर जाम पी रहे थे कनपटी पर बाल सफेद हो रहे थे इस अवस्था में भी शरीर गठीला था चेहरे पर रौनक थी देह पर महंगे कपड़े थे चेहरे से धनाढ्य दिखाई दे रहे थे राजू ने दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते कहा था फिर क्या मैं यहां बैठ सकता हूं ।

जी बिल्कुल 

उसने वेटर को आवाज देकर सोड़ा गिलास स्नेक्स लाने को कहा था सब कुछ आने के बाद 

उसकी जो चिरपरिचित शैली थी जल्दी जल्दी दो लार्ज पैग हलक में उतार लिए थे फिर एक डकार ली थी जेब से सिगरेट का पैकेट निकाल कर सामने वाले सज्जन को आफर कि थी जो उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर ली थी फिर क्या दोनो के ही नथूने से धुआं बाहर निकल कर छल्ले बना रहे थे और बात चीत होने लगी थी एक दूसरे से परिचय हो रहा था साथ ही आपस में जाम टकरा रहें थें एकाएक मिसेज बबली का फोन आया था 

हेलो हैलो 

हा बोलिए 

सब्जी क्या बनाऊं मिसेज बबली ने कहा था 

एक काम किजिए आप प्याज लहसुन मसाला तैयार कर लेना में चिकन लेकर आता हूं हां मेरे साथ भाईसाहब भी आएंगे ।

आप से मिलकर बहुत खुशी हुई भाईसाहब और हा आज आप को मेरे घर पर ही खाना खाना हैं चाचा जी कसम से अजी अभी तो नो ही बज रहे हैं  कसम से चिकन लेकर चलता हु अजी मेरी धर्म पत्नी पाक कला में निपुण हैं आप एक बार खा कर तो देखिए उंगली चाटते रह जाओगे राजू ने लड़खड़ाती जुबान से कहा था फिर क्या एक बोतल व्हिस्की ली गई थी ताजा चिकन लिया गया था  वह बात अलग थी कि पैसा सज्जन पुरुष ने ही दिए थे राजू सज्जन पुरुष कि कार में सवार होकर घर पहुंचा था बोरवेल बजते ही मिसेज बबली ने दरवाजा खोला था उनकी देह पर झीना सा गाऊन था जिसमें से उनके निजी अंगों कि झलक दिखाई दे रही थी खैर मिसेज बबली ने दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते भाई साहब कहा था फिर क्या पहले जैसी ही बेडरूम में बैठक जम गई थी ठंडा पानी गिलास सलाद पहले से तैयार थी पटियाला पेग बनाया गया था उधर मिसेज बबली चिकन पका रही थी फिर बीच बीच में कभी सलाद पानी चिकन पीस मंद मंद मुस्कान से परोश रहीं थीं  खैर तीनों ने ही भोजन कर लिया था फिर राजू उलजलूल हरक़त करने लगा था जैसे कि चूमा चाटी सीना मसलना कपड़े खोलना आदि वह भी पराए मर्द के सामने!

बबली कह रहीं थीं देखो तुम क्या कर रहे हों चाचा जी के सामने कितनी बार कहूं कि ज्यादा मत पियो तुम्हें क्या तुम्हें तो घर से कुछ लेना देना ही नहीं किचन में राशन पानी नहीं है गैस कि टंकी भी खाली होने वाली है बिजली का बिल भी जमा करना है और घर में एक पैसा भी नहीं है समझें अब तुम सौ जाइए सचमुच राजू करवट बदल कर लेट गया था ।

सज्जन पुरुष ने कुछ हजार रुपए पर्स से निकाल कर बबली को दिए थे जिसको उसने यह कहकर वापस दे दिए थे कि में सेक्स वर्कर नहीं तब उन्होंने मान मनौव्वल कर कहा था अभी तों रख लिजिए जब तुम्हारे पास आ जाएं वापस कर देना ठीक है अपना काम निकाल लेना ।

बबली रुपए अलमारी में रख रहीं थीं तभी सज्जन पुरुष ने उसे पीछे से पकड़ लिया था उनके अंदर बैठा नाग फुफकार रहा था थोड़ी देर बाद ही दोनों जन्म जात नग्न अवस्था में थें विस्तर अखाड़ा बना हुआ था तभी राजू ने करवट बदली थी फिर आंख खोलकर यह क्या मेरी पत्नी किसी गैर मर्द के साथ यह पलंग क्यों हिल रहा है और यह कामुक आवाजें क्यों आ रही हैं यह तो मेरी बीवी ही खिलखिला रही है उसके एसे बड़बड़ाने पर सज्जन पुरुष डर गया था तभी मिसेज बबली ने कहा था तुम सपने में हों न जाने तुम्हारे सपने देखने कब बंद होंगे करवट बदल कर सौ जाइए समझें ।

राजू खरांटे लेने लगा था इधर थोड़ी देर बाद सांस थम गई थी कुछ देर एक दूसरे से चिपटे रहने के बाद बबली ने तृप्ति से भरा माथे का चुंबन लिया था फिर कहां था बाप रे बाप आप मेरे बाप कि उम्र से भी आगे है उसके बाद भी ऐसी ताकत पूरा थका दिया भाईसाहब रोम रोम तृप्त कर दिया अब आप जल्दी से कपड़े पहन कर जाइए फिर से आना ।

सुबह कि दिनचर्या शुरू हो गई थी जैसे कि पूजा पाठ देव स्थान दर्शन, फिर सभी मिलने जुलने वाले लोगो से हाथ जोड़कर नमस्ते कहना धर्म, धार्मिक ग्रंथों पर चर्चा करना आदि कभी कभी कोई पड़ोसन महिला कहती आप के घर कोई मेहमान आए थे क्या तब मिसेज बबली बढ़ी ही मासुमियत से जवाब देकर कहती थी जी मेरे पति के आफिस से साहब आए थे कभी मेरे मायके से मेरे चाचा जी थें कालौनी वाले मेहमानों कि उम्र देखकर विश्वास कर लेते थे फिर उनके उपर बहुत शरीफ परिवार है यह चस्पा लगा हुआ था ।

कुछ सालों बाद हम दो हमारे दो  एक लड़का लड़की दो बच्चे थें लड़का का चेहरा राजू जैसा ही था लड़की अपनी मां पर गई थी उसी कालोनी में हजार स्क्वायर फीट का खूबसूरत बंगला था कार थी बच्चे भी अच्छे स्कूल में पड़ रहें थें राजू ने मिल कि नौकरी छोड़ दी थी अब वह सरकारी कंट्रक्शन के बढ़े बढ़े ठेके लेता है कुल मिलाकर वह खुद कि कंपनी का मालिक है मिसेज बबली सामाजिक काम काज में आगे रहतीं हैं उन्होंने एन जी ओ खोल दिया है पर मेहमान अब कभी कभी ही टैंडर पास होने के लिए आते हैं कालौनी में लोग उनके शराफत के कायल हैं सचमुच ही वो शरीफ पति पत्नी ..हैं ।

 

 

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