डबल बैड कहानी

वह भादो माह कि काली रात्रि थी आसमान में मेघ भीषण गर्जन करते हुए धरती पर कभी तेज तब कभी धीमी गती से पानी कि धारा बूदो के रूप में बिखेर रहे थे कभी कभी हबा भी तेज गति से पेड़ पोधो को परेशान कर रही थी व कही दूर मेंढक, झींगुर कि टर टर … Read more