कारपोरेट कल्चर का प्यार कहानी जहां दिल से प्यार नहीं करते दिमाग से करते हैं क्योंकि दौलत ही सर्वोपरि है

 अंधेरी भादों मास कि ट्रेन घुप्प अंधेरे को चीरती हुई आगे बढ़ रही थी कभी कभी तेज बिजली चमकने से खिड़की से रोशनी अंदर पहुंच रही थी बाहर तेज वारिस हो रही थी ऐसे ही मौसम में में अहमदाबाद से इंदौर आ रहा था मेरी बर्थ नीचे थी सोचा कि सोने से पहले कुछ पेट … Read more