दादी ऐक वटवृक्ष बूढ़ौ कि सूझबूझ पर आधारित परिवार कि कहानी ।

भोर का समय था दूर कहीं मंदिर कि घंटि के साथ शंख कि आवाज आ रही थी उसके कुछ ही देर बाद कहीं दूर मुर्गा बाग लगा रहा था जिसकि आवाज रेल गाडी निकलने कि छप छप अवाज से दब रही थी शायद कोई मालगाड़ी निकली थी ऐसे ही समय में सुरभि पति कि छाती … Read more