चित्रकार कविता

 तुम चित्रकार हों कोई कहता तुम कलाकार हो कोई कहता तुम अदाकार हो कोई कहता तुम संसार का सार हो में तो तुम्हें चित्रकार जानता  इसी से अपना मानता इसी से में तुमसे नहीं डरता  चाहें जब तुम्हारे ही पीछे पड़ा रहता देखता हूं कि तू अप भीनी करूणा  दोनों में बहाता हैं  उनको मुस्कुराते … Read more