कमली कि व्यथा

 वह एक वर्षांत कि रात्रि थी आसमान में मेघ ढोल नगाड़ों के साथ उत्पाद मचा रहे थे रुक रुक कर बिजली चमक रही थी बादलों के गर्जन से चारों दिशाएं कांप रही थी दूर कहीं बिजली गिरी थी उसी के साथ बिजली चली गई थी शायद कहीं तार फाल्ट हों गये थें तभी तो सारा … Read more