अल्हड़ प्रेमका के साथ होली

 तेरे सांवले सलोने गाल उन पर लाल गुलाल। गुलाबी चेहरा उलझे बाल नजरे तेरी बनाती है जाल जाने क्यों आत्मा बेचारी लिए मन कि पिचकारी सदियों से देखें राह तुम्हारी मिलन के गीतों कि है वारी । लाज संकोच कर क्या जी सकोगे अनाड़ियों कि क्या परवाह करोगे यह परवाह वे आदर्श रोकेंगे मत करो … Read more