प्यार का दरिया कविता

 कुछ भी नहीं यहां जिसे कह दूं यह हमारा है सोचा था कभी दिल है मेरा आज वह भी तुम्हारा हैं। औरों का दिया हुआ नाम नहीं लगता यह प्यारा है। नफ़रत है मुझे उससे अंहकार का जो सहारा हैं। प़तिपल अंतर कहता  सिर्फ तू केवल तू हमारा है यह सुन यह जहां करता उपहास … Read more