बुरे काम का बुरा नतीजा अय्याश मां जो बच्चों को छोड़कर प्रेमी के साथ भाग गई

सांध्य काल का समय था वातावरण में ठंडक मौजूद थी चूंकि जाड़े के दिन थें पिछले दो तीन दिन से शीत लहर चल रही थी जो हाड़ कंपा देने वाली थी ऐसे ही मौसम में राकेश मोटरसाइकिल से दफ्तर से घर के लिए रवाना हुआं था हालांकि उसके देह पर गर्म कपड़े थे कानों पर … Read more

“में लेखक हूं”;कविता

जी हां मैं लेखक हूं में हू कल्पना लोक में पहुंच जाता हूं बिन प्लेन मंगल ग्रह रचाता हूं चांद पर बस्तियां खोजता हूं ओक्सीजन ओर पानी क्यों कि मैं ऐक लेखक हूं ।। मेरे पास है संवेदना कोमल हृदय जो गड़ता रहता है नित नए विचार और अविष्कार शब्द है अपरम्पार क्यों कि मैं … Read more

“में लेखक हूं”;कविता

जी हां मैं लेखक हूं में हू कल्पना लोक में पहुंच जाता हूं बिन प्लेन मंगल ग्रह रचाता हूं चांद पर बस्तियां खोजता हूं ओक्सीजन ओर पानी क्यों कि मैं ऐक लेखक हूं ।। मेरे पास है संवेदना कोमल हृदय जो गड़ता रहता है नित नए विचार और अविष्कार शब्द है अपरम्पार क्यों कि मैं … Read more

“में लेखक हूं”;कविता

 जी हां मैं लेखक हूं  में  हू कल्पना लोक में  पहुंच जाता हूं बिन प्लेन मंगल ग्रह  रचाता हूं चांद पर बस्तियां  खोजता हूं ओक्सीजन ओर पानी  क्यों कि मैं ऐक लेखक हूं ।। मेरे पास है संवेदना कोमल हृदय  जो गड़ता रहता है नित नए  विचार और अविष्कार  शब्द है अपरम्पार  क्यों कि मैं … Read more

“में लेखक हूं”;कविता

 जी हां मैं लेखक हूं  में  हू कल्पना लोक में  पहुंच जाता हूं बिन प्लेन मंगल ग्रह  रचाता हूं चांद पर बस्तियां  खोजता हूं ओक्सीजन ओर पानी  क्यों कि मैं ऐक लेखक हूं ।। मेरे पास है संवेदना कोमल हृदय  जो गड़ता रहता है नित नए  विचार और अविष्कार  शब्द है अपरम्पार  क्यों कि मैं … Read more