शब्दों का व्यापार लघु कविता

अब तो बस शब्दों का व्यापार है। सत्य असत्य का शब्द ही आधार है।। शब्दों से भरी हवाएं चारों ओर वह रही है शब्दों से भरे अखबारों कि रद्दी बिक रही है शब्दों से न जाने कितने वादे किए जाते हैं पूरे न किए तब शब्द ही माफी मांगते है शब्दों को ओढ़ अनेकों प्रतिभाएं … Read more

बड़ा दिन कविता

 आज तो बड़ा दिन था  पर पता नहीं चला बिना हलचल के ही गुजर गया रोज कि भाती सूरज उषा के साथ फाग खेलता आया संध्या के साथ आंख मिचौली करता चला गया चतुर्थी का चंद्रमा उभरा अपना शीतल प्रकाश बिखेर चल दिया तारों कि बारात आकाश में उतर मोन दर्शक बन चहुं ओर बिखर … Read more

” गरीबा कि दीपावली ” गरीब मजदूर के शोषण कि कहानी

यूं कोरोनावायरस ने सेठ साहूकारों कि दीवाली फीकी कर दी थी फिर भला दिहाड़ी मजदूरों कि क्या धनतेरस का दिन था कहते हैं इस दिन लक्ष्मी जी का धनाढ्य घर से गरीब घर में पदार्पण होता है या नहीं होता है यह तो आस्था का विषय है या यो कहें कर्म का लेखा जोखा है … Read more